नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को ‘दोधारी तलवार’ बताते हुए कहा कि यह तकनीक जहां धोखाधड़ी का तेजी से पता लगाने में मदद करती है, वहीं साइबर अपराधियों को अधिक बड़े और जटिल हमले करने में भी सक्षम बना सकती है। उन्होंने यह बात ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में कही।
सीतारमण ने कहा कि तकनीकी नवाचार की गति और सुरक्षा के बीच संतुलन जरूरी है। सरकार और नियामकों का उद्देश्य डर के कारण नवाचार को रोकना नहीं होना चाहिए, लेकिन तेज विकास की वजह से सुरक्षा से समझौता भी नहीं किया जा सकता। उन्होंने एआई के इस्तेमाल में मानवीय निगरानी और जवाबदेही बनाए रखने पर जोर दिया।
वित्त मंत्री ने कहा कि एआई निर्णय लेने में सहायता कर सकता है, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी इंसानों और संस्थानों की ही होनी चाहिए। नियामकों, कंपनियों के बोर्ड और प्रबंधन को यह समझना होगा कि एआई का इस्तेमाल कहां हो रहा है, वह किन फैसलों को प्रभावित कर रहा है और उसके विफल होने की स्थिति में क्या जोखिम पैदा हो सकते हैं।
भारत के युवा विकास की ताकत
सीतारमण ने भारत के जनसांख्यिकीय लाभ को लेकर निराशावादी दृष्टिकोण रखने वालों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी अब केवल भविष्य की संभावना नहीं है, बल्कि उद्यमिता, तकनीक और नए कारोबार के जरिए देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभा रही है। उन्होंने आलोचकों के ‘नाराज फूफा’ वाले अंदाज पर तंज कसते हुए कहा कि युवा पीढ़ी अपनी राह खुद बना रही है।
वित्त मंत्री ने भारतीय रिजर्व बैंक से डिजिटल रुपये और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) के पायलट कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि टोकनाइजेशन और डिजिटल वित्त के बढ़ते इस्तेमाल के बीच भारत को अपनी तकनीकी क्षमताओं को लगातार मजबूत करना होगा।





