नई दिल्ली। केंद्र सरकार देश में कौशल विकास को नई दिशा देने के लिए डिजिटल स्किलिंग पासपोर्ट, स्किलिंग एक्सचेंज और स्किलिंग स्कोर जैसी व्यवस्थाओं पर काम कर रही है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इंटीग्रेटेड स्कीम इन स्किलिंग आर्किटेक्चर (ISSA) शुरू करने के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। नीति आयोग की सिफारिशों के आधार पर इन पहलों को आगे बढ़ाया जा सकता है।
डिजिटल स्किलिंग पासपोर्ट में किसी व्यक्ति की शिक्षा, मौजूदा कौशल और समय के साथ हासिल की गई नई दक्षताओं का रिकॉर्ड एक जगह उपलब्ध रहेगा। व्यक्ति जैसे-जैसे नए कौशल सीखेगा, उन्हें भी इस पासपोर्ट में जोड़ा जा सकेगा। इससे नियोक्ताओं को उम्मीदवार की क्षमताओं को समझने में आसानी होगी।
प्रस्तावित स्किल स्कोर या फ्यूचर रेडिनेस इंडेक्स के जरिए यह आकलन किया जा सकेगा कि कोई व्यक्ति भविष्य में तकनीक और उद्योग में होने वाले बदलावों के लिए कितना तैयार है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित यह व्यवस्था व्यक्ति के कौशल, योग्यता और कार्यक्षेत्र के आधार पर उसकी संभावित रोजगार क्षमता का आकलन करने में मदद करेगी।
नीति आयोग ने राज्य स्तर पर डिजिटल स्किल एक्सचेंज बनाने की सिफारिश की है। इसमें सरकारी संस्थाओं और निजी उद्योगों को जोड़ा जा सकता है। कुशल युवा यहां अप्रेंटिसशिप और पार्ट टाइम रोजगार के अवसर तलाश सकेंगे। वहीं कम या गैर-कुशल श्रमिकों को जरूरतमंद उद्यमियों से जोड़ने के लिए मोबाइल आधारित वर्कफोलियो प्लेटफार्म विकसित करने का सुझाव दिया गया है।
पिछले 11 वर्षों में करीब 7.6 करोड़ लोगों को विभिन्न माध्यमों से कौशल प्रशिक्षण दिया गया है। हालांकि नीति आयोग का मानना है कि उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास नहीं होने के कारण इसका अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिल पाया। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के लिए एक अरब से अधिक लोगों को कौशल प्रशिक्षण देने की आवश्यकता बताई गई है। आयोग ने स्कूल स्तर से ही स्किलिंग शुरू करने और पाठ्यक्रम में बदलाव की भी सिफारिश की है।





