नई दिल्ली। देशभर में प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। महाराष्ट्र के नासिक में प्याज के दाम में एक महीने के भीतर करीब 76 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। कीमतों में इस उछाल के पीछे खरीफ फसल की आवक में कमी और मांग-आपूर्ति के बीच बढ़ता अंतर प्रमुख कारण माना जा रहा है।
नासिक देश के प्रमुख प्याज उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है और यहां के लासलगांव बाजार की कीमतों का असर देश के अन्य बाजारों पर भी पड़ता है। हाल के दिनों में मंडियों में आवक प्रभावित होने से थोक कीमतों पर दबाव बढ़ा है। इसके साथ ही घरेलू मांग में मजबूती और निर्यात गतिविधियों में सुधार ने भी कीमतों को ऊपर जाने में मदद की है।
बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने अपने बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारने का फैसला किया है। सरकार 24 अगस्त से नासिक से दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे शहरों तक प्याज पहुंचाने के लिए विशेष ट्रेनें चलाने की योजना पर काम कर रही है। इन शहरों में प्याज की खुदरा कीमतें राष्ट्रीय औसत से अधिक हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत हाल में करीब 42 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 45 प्रतिशत और पिछले महीने के मुकाबले करीब 19 प्रतिशत अधिक है। सरकार का मानना है कि बफर स्टॉक जारी होने और आपूर्ति बढ़ने से कीमतों पर दबाव कम किया जा सकता है।
प्याज की कीमत बढ़ने से जहां किसानों को बेहतर मंडी भाव मिलने की उम्मीद जगी है, वहीं उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। सरकार ने इस वर्ष बफर स्टॉक के लिए खरीद बढ़ाने की भी कोशिश की है। जुलाई में प्याज की खरीद कीमत बढ़ाकर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल की गई थी, ताकि सरकारी खरीद में तेजी लाई जा सके।
विशेषज्ञों की नजर अब नई फसल की आवक और बाजार में सरकारी स्टॉक की आपूर्ति पर है। यदि मंडियों में आवक बढ़ती है और सरकार की आपूर्ति व्यवस्था प्रभावी रहती है, तो आने वाले दिनों में प्याज की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है।





