नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अमेरिका द्वारा अपने सैन्य कमान के नाम से ‘इंडो’ शब्द हटाकर उसे फिर से ‘यूएस पैसिफिक कमांड’ किए जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह फैसला हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका को कमजोर करने वाला संकेत हो सकता है और यदि इसके पीछे व्यापक नीति बदलाव है तो यह क्वाड समूह के भविष्य पर भी असर डाल सकता है।
थरूर ने कहा कि पिछले आठ वर्षों से अमेरिका ‘इंडो-पैसिफिक’ अवधारणा को बढ़ावा देता रहा है, जिसमें भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखा गया था। ऐसे में नाम परिवर्तन केवल औपचारिक बदलाव नहीं माना जा सकता। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि यह रणनीतिक सोच में बदलाव का संकेत है तो इसे “क्वाड के ताबूत में आखिरी कील” के रूप में देखा जा सकता है।
दरअसल, अमेरिकी रक्षा विभाग ने अपने सैन्य कमान का नाम बदलकर फिर से ‘यूएस पैसिफिक कमांड’ कर दिया है। वर्ष 2018 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में इसका नाम बदलकर ‘यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड’ किया गया था। उस समय इसका उद्देश्य भारत की बढ़ती भूमिका को मान्यता देना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना बताया गया था।
हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि नाम परिवर्तन का अर्थ भारत के साथ संबंधों में किसी तरह की कमी नहीं है। उनका दावा है कि क्षेत्रीय सहयोग और सुरक्षा साझेदारी पहले की तरह जारी रहेगी। इसके बावजूद इस कदम ने रणनीतिक विशेषज्ञों और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। हाल के वर्षों में यह समूह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन और सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। ऐसे में अमेरिका के इस फैसले को लेकर विभिन्न राजनीतिक और रणनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
अब नजर इस बात पर है कि अमेरिकी प्रशासन इस बदलाव को लेकर आगे क्या स्पष्टीकरण देता है और इसका भारत-अमेरिका संबंधों तथा क्वाड की गतिविधियों पर क्या प्रभाव पड़ता है।





