इस्लामाबाद। यमन के हूती विद्रोहियों के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच पाकिस्तान ने फिलहाल सऊदी अरब के समर्थन में सीधे सैन्य अभियान में शामिल होने से इनकार किया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि हूती हमलों के जवाब में सैन्य कार्रवाई को लेकर अभी कोई चर्चा नहीं हुई है। हालांकि, इस्लामाबाद ने सऊदी अरब की संप्रभुता और सुरक्षा के प्रति अपना समर्थन दोहराया है।
पाकिस्तान का यह रुख ऐसे समय आया है, जब हाल ही में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच मक्का संयुक्त रक्षा समझौता हुआ है। समझौते के तहत किसी एक सदस्य देश पर सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। हालांकि, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने स्पष्ट किया कि फिलहाल इस समझौते के तहत हूती हमलों के जवाब में किसी सैन्य कार्रवाई पर विचार नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान समझौते के प्रावधानों के तहत कार्रवाई करेगा।
सऊदी की सुरक्षा को समर्थन
पाकिस्तान ने हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के शहरों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर किए गए हमलों की निंदा की है। इस्लामाबाद ने कहा है कि वह सऊदी अरब की क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा के समर्थन में खड़ा है। हालांकि, यमन में हूती ठिकानों के खिलाफ सीधे सैन्य अभियान में पाकिस्तानी सैनिकों की भागीदारी की फिलहाल कोई घोषणा नहीं हुई है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान सऊदी अरब को रक्षा तंत्र, प्रशिक्षण और अन्य सुरक्षा सहयोग उपलब्ध करा सकता है, लेकिन यमन में सीधे लड़ाई में उतरने से फिलहाल बच रहा है। मक्का समझौते की वास्तविक सैन्य व्याख्या और उसके संचालन को लेकर भी अभी कई पहलू स्पष्ट किए जा रहे हैं।
क्षेत्रीय तनाव बढ़ा
हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तनाव हाल के दिनों में बढ़ा है। लाल सागर और बाब अल-मंदेब क्षेत्र में हूती गतिविधियों से समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी असर पड़ रहा है। इस बीच सऊदी अरब अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए विभिन्न देशों से सहयोग की संभावनाएं तलाश रहा है। कुछ रिपोर्टों में इजरायल से खुफिया सहयोग की संभावनाओं का भी उल्लेख किया गया है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल पाकिस्तान का कहना है कि वह क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए प्रयास जारी रखेगा और सऊदी अरब के साथ अपने रक्षा समझौतों के तहत प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा।





