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हथियारों की तस्करी कर अंदर से किए गए हमले

इस्राइली खुफिया एजेंसी ‘मोसाद’ ने ईरान के अंदर हथियारों की तस्करी की। जानकारी के मुताबिक. हमला शुरू होने से पहले ईरान के भीतर ही ड्रोन और अन्य हथियारों को सक्रिय किया गया। ये हमला तेहरान के पास ईरानी मिसाइल बेस को निशाना बनाने के लिए किया गया। वहीं इस हमले में मारे गए ईरानी सैन्य अधिकारियों की जगह अब नए कमांडरों की नियुक्ति कर दी गई है। इस्राइल ने शुक्रवार को ईरान पर एक बड़ा हमला किया, जिसकी तैयारी गुप्त रूप से पहले ही कर ली गई थी। इस बात की जानकारी दो इस्राइली सुरक्षा अधिकारियों ने दी, जिन्होंने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बात की। इन अधिकारियों के अनुसार, इस्राइली खुफिया एजेंसी मोसाद ने हमले से पहले ईरान के अंदर ड्रोन, सटीक निशाना लगाने वाले हथियार और अन्य विस्फोटक सामग्री भेज दी थी। इन हथियारों का इस्तेमाल ईरान की राजधानी तेहरान के पास स्थित मिसाइल बेस को निशाना बनाने में किया गया। बताया गया कि ईरान के अंदर एक गुप्त ठिकाने से विस्फोटक ड्रोन उड़ाए गए और साथ ही कुछ वाहनों में लगाए गए हथियार सिस्टम भी सक्रिय किए गए। इनका मकसद ईरान की हवाई सुरक्षा प्रणाली को कमजोर करना था।इस्राइली हमले में ईरान के दो शीर्ष सैन्य अधिकारी मारे गए। इसके बाद ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई ने तुरंत नए सैन्य प्रमुखों की नियुक्ति कर दी है। बता दें कि, जनरल अब्दुर्रहीम मूसेवी को ईरानी सशस्त्र बलों का नया प्रमुख बनाया गया है। इससे पहले वे थल सेना के प्रमुख थे। मोहम्मद पाकपुर को इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) का नया कमांडर बनाया गया है। उन्होंने जनरल होसैन सलामी की जगह ली है। आईआरजीसी ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य इकाई मानी जाती है, जो 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद बनाई गई थी और देश की धार्मिक सरकार का अहम स्तंभ है।

अभी तक इस हमले को लेकर ईरान या इस्राइल की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन पश्चिमी मीडिया और सुरक्षा विशेषज्ञ इसे इस्राइल की नई तरह की गुप्त सैन्य कार्रवाई मान रहे हैं, जिसमें देश के अंदर से ही हमला किया गया है। हालात फिलहाल बेहद तनावपूर्ण हैं, और इस हमले के बाद ईरान की प्रतिक्रिया और संभावित जवाबी कार्रवाई पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। इस्राइल और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अगर दोनों देशों के बीच यह संघर्ष और गहराया, तो पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

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