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भारत में रह रहे छह गैर-मुस्लिम समुदायों के लिए बदले वीजा नियम, गृह मंत्रालय ने जारी किया नया आदेश

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से भारत आए छह अल्पसंख्यक समुदायों के लिए वीजा और यात्रा दस्तावेजों से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ‘इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स (एग्जेम्पशन) अमेंडमेंट ऑर्डर, 2026’ जारी कर नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारत में लगातार रहने के लिए अब उचित श्रेणी का वीजा प्राप्त करना होगा।

गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, इन छह समुदायों के वे लोग इस व्यवस्था के दायरे में आएंगे, जो 31 दिसंबर 2024 तक धार्मिक उत्पीड़न या उत्पीड़न की आशंका के कारण भारत में शरण लेने पहुंचे थे। इसमें वे लोग भी शामिल हैं, जो बिना वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेजों के भारत आए थे अथवा जिनके दस्तावेजों की वैधता समाप्त हो चुकी है।

पहले दी गई छूट में हुआ बदलाव

इससे पहले इन छह समुदायों के लोगों को भारत में प्रवेश और रहने के लिए वैध पासपोर्ट और वीजा की अनिवार्यता से छूट दी गई थी। नए संशोधन में प्रवेश के समय दस्तावेजों से जुड़ी छूट बरकरार रखी गई है, लेकिन भारत में आगे रहने के लिए उचित श्रेणी का वीजा लेना अनिवार्य किया गया है।

पाकिस्तानी नागरिकों को भी कुछ मामलों में राहत

सरकार ने कुछ पाकिस्तानी नागरिकों को भी राहत दी है। इसमें वे लोग शामिल हैं, जो 31 दिसंबर 2009 या उससे पहले स्थायी रूप से भारत में बसने के इरादे से आए थे, लेकिन पाकिस्तान का कंप्यूटरीकृत पहचान पत्र (CNIC) नहीं होने के कारण अपना पासपोर्ट नवीनीकृत नहीं करा पा रहे हैं। इसके अलावा कुछ अन्य निर्धारित श्रेणियों के लोगों को भी राहत दी गई है। हालांकि, उन्हें भारत में रहने के लिए उचित वीजा लेना होगा।

नेपाल-भूटान यात्रा के नियम भी बदले

नए आदेश में भारत, नेपाल और भूटान के नागरिकों की आवाजाही से जुड़े दस्तावेजी नियमों में भी बदलाव किया गया है। इन देशों के बीच सीधे यात्रा करने वाले नागरिकों को पासपोर्ट के स्थान पर सरकार के वीजा मैनुअल में निर्धारित पहचान दस्तावेज प्रस्तुत करने की सुविधा दी गई है। हालांकि, कुछ तीसरे देशों के रास्ते यात्रा करने पर पासपोर्ट और वीजा अनिवार्य रहेगा।

सरकार ने पंजीकृत श्रीलंकाई तमिल शरणार्थियों, कुछ तिब्बती नागरिकों और आधिकारिक ड्यूटी पर जाने वाले भारतीय सैन्य कर्मियों के लिए भी विशेष छूट का प्रावधान किया है।

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