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इराक का हवाई क्षेत्र खुलने से यात्रियों को बड़ी राहत, दिल्ली-मुंबई से न्यूयॉर्क का सफर चार घंटे हुआ कम

नई दिल्ली। भारत से अमेरिका की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। इराक का हवाई क्षेत्र दोबारा उपलब्ध होने के बाद एअर इंडिया ने दिल्ली और मुंबई से न्यूयॉर्क के लिए अपनी नॉन-स्टॉप उड़ान सेवाएं फिर शुरू कर दी हैं। इससे यात्रियों का करीब चार घंटे का समय बचेगा। पहले जहां इस यात्रा में लगभग 20 घंटे लगते थे, वहीं अब यह सफर करीब 15 से 16 घंटे में पूरा हो सकेगा।

एअर इंडिया ने चार नवंबर से दिल्ली और मुंबई को न्यूयॉर्क के जॉन एफ. कैनेडी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (JFK) तथा नेवार्क लिबर्टी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (EWR) से जोड़ने वाली चार उड़ानों को दोबारा नॉन-स्टॉप कर दिया है। इससे पहले इन उड़ानों को इटली की राजधानी रोम में ईंधन भरने के लिए रुकना पड़ता था।

अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण बदला था मार्ग

दरअसल, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिम एशिया के कई हवाई मार्ग प्रभावित हो गए थे। सुरक्षा कारणों से एअर इंडिया को अपनी उड़ानों के मार्ग में बदलाव करना पड़ा था। इसके चलते न्यूयॉर्क जाने वाली उड़ानों को रोम में रुकना पड़ रहा था, जिससे यात्रा का समय बढ़ गया था।

अब इराक, सीरिया और जॉर्डन के हवाई मार्गों से जुड़े सुरक्षा जोखिमों में कमी आने के बाद एअर इंडिया को अपेक्षाकृत छोटा रास्ता उपलब्ध हो गया है। इसी कारण रोम में रुकने की आवश्यकता समाप्त हो गई है।

पाकिस्तान और ईरान के हवाई क्षेत्र अब भी चुनौती

हालांकि, एअर इंडिया के लिए सभी समस्याएं अभी समाप्त नहीं हुई हैं। पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र भारतीय विमानन कंपनियों के लिए प्रतिबंधित है, जबकि ईरान के हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल भी फिलहाल संभव नहीं है। इस कारण विमानों को अब भी अपेक्षाकृत लंबे मार्ग से उड़ान भरनी पड़ रही है।

लंबे मार्ग के कारण विमानों में अधिक ईंधन ले जाना पड़ता है, जिससे यात्रियों और माल की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।

जनवरी से फिर बढ़ सकती हैं मुश्किलें

एअर इंडिया को उम्मीद है कि नवंबर और दिसंबर के दौरान न्यूयॉर्क की उड़ानें नॉन-स्टॉप जारी रहेंगी। हालांकि, जनवरी से तेज विपरीत हवाओं और विमानों पर अधिक भार की स्थिति में कुछ उड़ानों को दोबारा ईंधन भरने के लिए रुकना पड़ सकता है।

एअर इंडिया को ईरान का हवाई क्षेत्र भी जल्द उपलब्ध होने की उम्मीद है। इससे यूरोप और उत्तरी अमेरिका के लिए उड़ान सेवाओं का विस्तार करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल नई व्यवस्था से भारत और अमेरिका के बीच यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों को समय की बचत होगी।

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