Saturday, February 28, 2026

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बिंदुखत्ता के संघर्ष की जीत: सीएम धामी ने दी राजस्व ग्राम बनाने की मंजूरी; दशकों पुराना वन भूमि विवाद खत्म, हजारों परिवारों को मिलेगा मालिकाना हक

हल्द्वानी/लालकुआं: नैनीताल जिले के तराई क्षेत्र में स्थित बिंदुखत्ता के हजारों निवासियों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने के प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। दशकों से वन भूमि पर बसे इस विशाल क्षेत्र के निवासी अपने अस्तित्व और मालिकाना हक की लड़ाई लड़ रहे थे। मुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद अब बिंदुखत्ता नगर पालिका या राजस्व गांव की श्रेणी में आकर विकास की मुख्यधारा से सीधे जुड़ सकेगा। इस कदम से न केवल क्षेत्र में सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा, बल्कि निवासियों को अपनी जमीन पर कानूनी अधिकार भी प्राप्त होगा।

राजस्व ग्राम बनने के क्या होंगे लाभ?

बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा मिलने से वहाँ की व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे:

  • मालिकाना हक: अब तक वन भूमि होने के कारण निवासियों के पास अपनी जमीन के पक्के दस्तावेज नहीं थे। राजस्व ग्राम बनने के बाद उन्हें खतौनी और पट्टे मिल सकेंगे।
  • सरकारी योजनाओं की पहुँच: राजस्व श्रेणी में आने के बाद यहाँ पक्की सड़कों, नालियों, बिजली और पानी की लाइनों का विस्तार सुगम हो जाएगा। अब तक वन भूमि के कड़े कानूनों के कारण यहाँ विकास कार्य बाधित रहते थे।
  • बैंक ऋण की सुविधा: अब यहाँ के किसान और छोटे व्यापारी अपनी जमीन के कागज दिखाकर बैंकों से कृषि या व्यवसाय ऋण (Loan) प्राप्त कर सकेंगे, जो अब तक संभव नहीं था।
  • स्थायी निकाय का गठन: राजस्व ग्राम घोषित होने के बाद यहाँ पंचायत या नगर निकाय के चुनाव हो सकेंगे, जिससे स्थानीय स्वशासन को मजबूती मिलेगी।

लंबा संघर्ष और राजनीतिक इच्छाशक्ति

बिंदुखत्ता का मुद्दा उत्तराखंड की राजनीति में हमेशा से केंद्र बिंदु रहा है:

  1. पूर्व सैनिकों और किसानों का क्षेत्र: बिंदुखत्ता मुख्य रूप से पूर्व सैनिकों और सीमांत किसानों द्वारा बसाया गया क्षेत्र है। पिछले 40 वर्षों से यहाँ के लोग हर चुनाव में राजस्व ग्राम की मांग उठाते रहे हैं।
  2. कानूनी अड़चनें: पूर्व में वन भूमि होने के कारण केंद्र सरकार और वन विभाग की आपत्तियों की वजह से यह मामला लटका हुआ था। सीएम धामी ने इस दिशा में केंद्र से समन्वय कर कानूनी बाधाओं को दूर करने का प्रयास किया है।
  3. धामी का मास्टरस्ट्रोक: राजनीतिक विश्लेषक इसे सीएम धामी का एक बड़ा दांव मान रहे हैं, जिससे तराई क्षेत्र में सरकार की पकड़ और मजबूत होगी।

मुख्यमंत्री का संबोधन: ‘बिंदुखत्ता के हक की बहाली’

मंजूरी देने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा:

  • बिंदुखत्ता के लोगों ने राज्य के विकास में बड़ा योगदान दिया है, लेकिन वे अपने ही घर में मालिकाना हक से वंचित थे।
  • हमारी सरकार ‘सरलीकरण और समाधान’ के मंत्र पर काम कर रही है। राजस्व ग्राम बनने से यहाँ विकास की नई इबारत लिखी जाएगी।
  • जल्द ही राजस्व विभाग को सीमांकन (Demarcation) की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

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