गोपेश्वर (चमोली): उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में वसंत के आगमन के साथ ही होली की छटा बिखरने लगी है। चमोली जिले के प्रसिद्ध गोपीनाथ मंदिर में मनायी जाने वाली होली इस बार भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। अपनी अनूठी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के लिए विख्यात इस मंदिर में भगवान शिव के चरणों में गुलाल अर्पित करने के साथ होली के उत्सव का विधिवत आगाज़ हुआ। इस अलौकिक दृश्य का साक्षी बनने और रंगों में सराबोर होने के लिए देश के कोने-कोने के साथ-साथ विदेशों से भी भारी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु गोपेश्वर पहुँच रहे हैं।
गोपीनाथ की होली क्यों है खास?
गोपीनाथ मंदिर की होली अन्य स्थानों से काफी भिन्न और ऐतिहासिक महत्व वाली मानी जाती है:
- शिव और शक्ति का मिलन: यहाँ होली केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव है। मंदिर के प्रांगण में भगवान गोपीनाथ (शिव) के विग्रह को विशेष रंगों से सजाया जाता है और श्रद्धालु ‘शिव के गण’ बनकर उत्सव मनाते हैं।
- पारंपरिक छरौड़ी: यहाँ की होली में ‘छरौड़ी’ (रंगों की होली) का विशेष महत्व है। स्थानीय लोग पारंपरिक ढोल-दमाऊ और मशकबीन की थाप पर लोक गीतों का गायन करते हुए झूमते हैं।
- विदेशी मेहमानों का आकर्षण: मंदिर की वास्तुकला और यहाँ के शांत वातावरण में रंगों का उत्सव देखने के लिए यूरोप और अमेरिका से आए पर्यटक भी स्थानीय वेशभूषा में रंगे नजर आ रहे हैं।
सांस्कृतिक धरोहर: लोक गायन और खड़ी होली
मंदिर परिसर में आयोजित होने वाली बैठकी और खड़ी होली की गूँज पूरे गोपेश्वर नगर में सुनाई दे रही है:
- होली के गीत: ‘जल कैसे भरूँ…’ और ‘ऐसी होरी खेलें शिव गोपीनाथ…’ जैसे पारंपरिक गीतों से मंदिर का वातावरण भक्तिमय हो गया है।
- सामुदायिक सद्भाव: इस उत्सव में जाति और धर्म की दीवारें टूट जाती हैं। गाँव-गाँव से आए लोग एक ही थाल से अबीर-गुलाल उड़ाकर आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश देते हैं।
- प्रसाद का वितरण: होली के अवसर पर विशेष रूप से तैयार किया गया ‘भांग की ठंडाई’ और स्थानीय व्यंजनों का प्रसाद भक्तों में वितरित किया जाता है।
पर्यटन और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर समिति ने व्यापक प्रबंध किए हैं:
- यातायात व्यवस्था: गोपेश्वर बाजार से मंदिर मार्ग तक यातायात को सुव्यवस्थित किया गया है ताकि पर्यटकों को असुविधा न हो।
- सुरक्षा घेरा: महिला पुलिस कर्मियों और सीसीटीवी कैमरों के जरिए भीड़ पर नजर रखी जा रही है।
- साफ-सफाई: मंदिर समिति ने ‘इको-फ्रेंडली’ होली को बढ़ावा देते हुए केवल प्राकृतिक रंगों (फूलों और जड़ी-बूटियों से निर्मित) के उपयोग की अपील की है।





