देहरादून: ‘नारीशक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण विधेयक) के लोकसभा में पारित न हो पाने के बाद उत्तराखंड की सियासत पूरी तरह गर्मा गई है। इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार अब आर-पार के मूड में नजर आ रही है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस विषय पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की सुगबुगाहट के बीच, अब उत्तराखंड में भी इसी तरह की सक्रियता बढ़ गई है। माना जा रहा है कि धामी सरकार जल्द ही विधानसभा का एक विशेष सत्र आहूत कर सकती है, जिसमें महिला सशक्तिकरण और आरक्षण के संकल्प को दोहराया जाएगा।
विशेष सत्र के जरिए राजनीतिक संदेश देने की कवायद
सरकारी सूत्रों के अनुसार, धामी सरकार इस अधिनियम को लेकर बेहद गंभीर है।
- उत्तर प्रदेश की तर्ज पर तैयारी: उत्तर प्रदेश में विशेष सत्र बुलाने की खबरों के बाद उत्तराखंड शासन में भी हलचल तेज हो गई है। इसका मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि राज्य सरकार महिलाओं को राजनैतिक भागीदारी देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
- संवैधानिक संकल्प: विशेष सत्र बुलाने के पीछे सरकार की मंशा यह है कि सदन के पटल से एक मजबूत संदेश दिया जाए कि उत्तराखंड की ‘नारी शक्ति’ के अधिकारों की राह में किसी भी बाधा को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
विपक्ष पर हमलावर हुई भाजपा; शुरू होगा ‘महाआक्रोश अभियान’
लोकसभा में विधेयक के गिरने के बाद से ही भाजपा ने कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
- नारीशक्ति के अपमान का आरोप: भाजपा का स्पष्ट आरोप है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने तकनीकी बहानों से इस ऐतिहासिक विधेयक को रोका है, जो सीधे तौर पर देश की महिलाओं का अपमान है।
- सड़कों पर उतरेगी ‘महिला ब्रिगेड’: भाजपा ने अब इस मुद्दे को जन-आंदोलन बनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत पूरे प्रदेश में ‘महाआक्रोश अभियान’ संचालित किया जाएगा, जिसमें महिलाओं के साथ हुए कथित अन्याय को जनता के बीच ले जाया जाएगा।
पदयात्रा और सम्मेलनों से बनेगी रणनीति
पार्टी संगठन ने इस मुद्दे पर विपक्ष को घेरने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है:
- मंडल स्तर पर सम्मेलन: उत्तराखंड के सभी मंडलों और जिलों में महिला सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा, जहाँ वक्ता इस विधेयक के महत्व और विपक्ष की भूमिका पर प्रकाश डालेंगे।
- जन-जागरण पदयात्रा: प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में पदयात्राएं निकाली जाएंगी, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को भी यह समझाया जा सके कि उनके आरक्षण की राह में कौन राजनीतिक दल बाधक बन रहे हैं।
- सोशल मीडिया और डोर-टू-डोर कैंपेन: डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ-साथ घर-घर जाकर भी इस मुद्दे पर भाजपा का पक्ष रखा जाएगा।





