देहरादून: उत्तर भारत के अन्य राज्यों की तरह उत्तराखंड में भी सूर्य देव के तीखे तेवरों ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पहाड़ों से लेकर मैदानों तक चटक धूप खिलने के कारण तापमान में तेजी से उछाल दर्ज किया जा रहा है। मौसम विभाग के ताजा अनुमान के मुताबिक, अगले दो दिनों तक प्रदेशवासियों को भीषण गर्मी और तपिश का सामना करना पड़ेगा, हालांकि सप्ताह के अंत तक पर्वतीय क्षेत्रों में हल्की बारिश से मामूली राहत मिलने की उम्मीद जताई गई है।
मैदानी इलाकों में गर्म हवाओं का प्रकोप
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, आगामी दो दिनों तक पूरे प्रदेश में मौसम शुष्क बना रहेगा।
- गर्म हवाएं: विशेषकर हरिद्वार, उधमसिंह नगर और देहरादून के मैदानी इलाकों में दिन के समय गर्म हवाएं (लू) चलने की आशंका है, जिससे दोपहर के वक्त घरों से बाहर निकलना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
- तापमान में वृद्धि: सोमवार को राजधानी देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में सुबह से ही कड़ी धूप रही, जिसके चलते अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुँचा। चटक धूप और बढ़ती आर्द्रता के कारण उमस भरी गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया है।
न्यूनतम तापमान में भी उछाल
गर्मी का असर केवल दिन के समय ही नहीं, बल्कि रात के वक्त भी महसूस किया जा रहा है। राज्य के ज्यादातर हिस्सों में न्यूनतम तापमान में सामान्य से 2 से 3 डिग्री की वृद्धि दर्ज की गई है। पहाड़ी जिलों जैसे मसूरी, नैनीताल और मुक्तेश्वर में भी अब सुबह-शाम की ठंड कम होने लगी है और दिन का पारा तेजी से चढ़ रहा है।
गुरुवार से राहत की उम्मीद: पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा के आसार
मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की है कि गुरुवार से प्रदेश के मौसम के मिजाज में कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है।
- बादलों की आवाजाही: गुरुवार से उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जैसे उच्च हिमालयी जिलों में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है।
- हल्की बारिश: पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के चलते इन पर्वतीय जिलों के कुछ स्थानों पर हल्की वर्षा या गर्जना के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। यदि पहाड़ों में बारिश होती है, तो मैदानी इलाकों के तापमान में भी 1 से 2 डिग्री की गिरावट आने की उम्मीद है।
डॉक्टरों की सलाह: डिहाइड्रेशन से बचें
भीषण गर्मी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी है। चिकित्सकों का कहना है कि चटक धूप के सीधे संपर्क में आने से बचें और शरीर में पानी की कमी न होने दें। विशेष रूप से बुजुर्गों और बच्चों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर न निकलने की हिदायत दी गई है।





