रामनगर: प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीवों की अठखेलियों को करीब से देखने के शौकीनों के लिए उत्तराखंड का जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क एक अनूठी सौगात लेकर आ रहा है। पार्क प्रशासन अब सैलानियों को जंगल के भीतर अधिक समय बिताने और वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में गहराई से समझने का मौका देने जा रहा है। राजस्थान के रणथंभौर और महाराष्ट्र के ताडोबा जैसे प्रसिद्ध नेशनल पार्कों की तर्ज पर अब कॉर्बेट में भी ‘फुल डे सफारी’ (Full Day Safari) शुरू करने की योजना बनाई गई है।
चार प्रमुख जोन से होगी शुरुआत
पार्क प्रशासन ने इस महत्वाकांक्षी योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का निर्णय लिया है। प्रथम चरण में कॉर्बेट के सबसे लोकप्रिय पर्यटक जोनों को इसके लिए चुना गया है:
- चिह्नित क्षेत्र: इस योजना का आगाज बिजरानी, गर्जिया, ढेला और झिरना जोनों से किया जाएगा।
- समय की पाबंदी से मुक्ति: वर्तमान में पर्यटकों को सफारी के लिए केवल कुछ घंटों का निर्धारित समय (मॉर्निंग या ईवनिंग शिफ्ट) मिलता है, लेकिन नई व्यवस्था के तहत सैलानी सूर्योदय से सूर्यास्त तक जंगल के भीतर रह सकेंगे।
रणथंभौर और ताडोबा की तर्ज पर विकास
कॉर्बेट नेशनल पार्क इस मॉडल को देश के अन्य सफल टाइगर रिजर्व के अनुभवों के आधार पर अपना रहा है।
- बेहतर अनुभव: विशेषज्ञों का मानना है कि फुल डे सफारी से पर्यटकों को बाघ (टाइगर) और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों के दीदार होने की संभावना काफी बढ़ जाएगी।
- फोटोग्राफी के लिए वरदान: यह योजना विशेष रूप से वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों और शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी, जिन्हें वन्यजीवों की गतिविधियों को कैद करने के लिए लंबे इंतजार की आवश्यकता होती है।
शुल्क निर्धारण का इंतजार
योजना का खाका पूरी तरह तैयार कर लिया गया है, हालांकि इसे धरातल पर उतारने के लिए अभी एक अंतिम प्रक्रिया शेष है।
- शासन की मंजूरी: सफारी के लिए विशेष शुल्क (फीस) के निर्धारण का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है।
- योजना का शुभारंभ: जैसे ही शासन स्तर से इसके लिए अलग शुल्क का गजट जारी कर दिया जाएगा, वैसे ही ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल पर ‘फुल डे सफारी’ का विकल्प उपलब्ध करा दिया जाएगा।
पर्यटन और स्थानीय रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
इस नई पहल से न केवल पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने की उम्मीद है, बल्कि स्थानीय जिप्सी चालकों और गाइडों के लिए भी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। पार्क के अधिकारियों का कहना है कि फुल डे सफारी के दौरान वन्यजीवों की शांति भंग न हो और पारिस्थितिकी तंत्र पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े, इसके लिए सख्त दिशा-निर्देश और सीमित वाहनों की संख्या सुनिश्चित की जाएगी।





