पिथौरागढ़: उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में बंद पड़ा कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग तीसरे दिन फिर खोल दिया गया। मार्ग खुलने के बाद व्यास घाटी की ओर आवाजाही शुरू हो गई। इससे क्षेत्र के ग्रामीणों और प्रशासनिक टीमों को राहत मिली है।
जानकारी के अनुसार, बारिश और भूस्खलन के कारण तवाघाट-गुंजी मार्ग पर मलबा और बोल्डर आने से आवाजाही बाधित हो गई थी। लगातार खराब मौसम के बीच सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीम मार्ग खोलने के लिए जुटी रही। मलबा हटाने और सड़क को सुरक्षित बनाने के बाद यातायात बहाल किया गया।
मार्ग खुलने के बाद जनगणना टीम व्यास घाटी के लिए रवाना हुई। टीम को सीमांत गांवों में जनगणना संबंधी कार्य करना है। मार्ग बंद होने के कारण टीम की आवाजाही प्रभावित हुई थी। सड़क खुलने के बाद अब प्रशासनिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
कैलास मानसरोवर यात्रा के लिहाज से भी यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। पिथौरागढ़ का लिपुलेख मार्ग कैलास मानसरोवर यात्रा के प्रमुख मार्गों में शामिल है। हालांकि इस वर्ष की यात्रा अगस्त में पूरी हो चुकी है, लेकिन यह मार्ग सीमांत गांवों और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ता है। विदेश मंत्रालय के अनुसार लिपुलेख दर्रे से होने वाली कैलास मानसरोवर यात्रा उत्तराखंड के इसी क्षेत्र से होकर गुजरती है।
मानसून के दौरान सीमांत क्षेत्र में लगातार बारिश से भूस्खलन और सड़क बाधित होने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे में मार्ग खुलने के बावजूद प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां मौसम तथा सड़क की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। यात्रियों और स्थानीय लोगों को खराब मौसम में अनावश्यक जोखिम न लेने की सलाह दी जाती है।
मार्ग बहाल होने से व्यास घाटी के ग्रामीणों को आवागमन में राहत मिलने के साथ जरूरी सामान और प्रशासनिक सेवाओं की आवाजाही भी सामान्य होने की उम्मीद है।





