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कैलाश मानसरोवर यात्रा: पहला जत्था सिक्किम पहुंचा, श्रद्धालुओं में उत्साह

गंगटोक। कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के तहत तीर्थयात्रियों का पहला जत्था सोमवार को सिक्किम पहुंच गया। यात्रा के लिए चयनित श्रद्धालु अब निर्धारित प्रक्रिया के तहत उच्च हिमालयी क्षेत्र के मौसम और वातावरण के अनुरूप खुद को ढालने के लिए विशेष अनुकूलन (एक्लाइमेटाइजेशन) कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इसके बाद वे नाथूला दर्रे के रास्ते तिब्बत स्थित कैलाश मानसरोवर की ओर प्रस्थान करेंगे।

विदेश मंत्रालय के समन्वय में आयोजित इस धार्मिक यात्रा के पहले दल को हाल ही में नई दिल्ली से रवाना किया गया था। यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने दिल्ली में स्वास्थ्य परीक्षण, दस्तावेज सत्यापन और अन्य औपचारिकताएं पूरी की थीं। इसके बाद उनका जत्था सिक्किम पहुंचा।

अधिकारियों के अनुसार, श्रद्धालुओं को ऊंचाई वाले क्षेत्रों की परिस्थितियों के अनुकूल बनाने के लिए चरणबद्ध कार्यक्रम तैयार किया गया है। यात्रियों को पहले लगभग 10,500 फीट की ऊंचाई वाले केंद्र में और फिर करीब 13,000 फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्र में ठहराया जाएगा, ताकि वे आगे की कठिन यात्रा के लिए शारीरिक रूप से तैयार हो सकें।

इस वर्ष नाथूला मार्ग से कुल 500 श्रद्धालुओं का चयन किया गया है, जिन्हें 50-50 यात्रियों के 10 दलों में भेजा जाएगा। अंतिम दल अगस्त तक यात्रा पर रवाना होगा। यात्रा के दौरान चिकित्सा सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और आवास संबंधी विशेष प्रबंध किए गए हैं।

कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन परंपरा के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है। श्रद्धालु भगवान शिव के निवास स्थल माने जाने वाले कैलाश पर्वत और पवित्र मानसरोवर झील के दर्शन के लिए इस कठिन लेकिन आध्यात्मिक यात्रा में शामिल होते हैं।

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