Top 5 This Week

Related Posts

एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 पर थरूर का हमला, बोले- नागरिक समाज और लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए गंभीर खतरा

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (एफसीआरए संशोधन बिल) को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक नागरिक समाज संगठनों, गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीओ) और स्वतंत्र आवाजों पर अनावश्यक नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास है। थरूर ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों के लिए गंभीर चुनौती बताया।

थरूर ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन सरकार को अत्यधिक शक्तियां प्रदान करता है, जिससे पंजीकरण रद्द होने की स्थिति में विदेशी सहायता से निर्मित परिसंपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है। उनके अनुसार, यह प्रावधान उन संस्थाओं के लिए चिंता का विषय है जो शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सेवा और मानवाधिकार जैसे क्षेत्रों में कार्य कर रही हैं।

कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार “जनहित” जैसे व्यापक और अस्पष्ट आधार का उपयोग कर संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। उनका कहना है कि इससे वास्तविक सामाजिक संगठनों के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और स्वतंत्र नागरिक संस्थाओं का दायरा सिमट सकता है।

थरूर ने विपक्षी दलों से इस विधेयक का संयुक्त रूप से विरोध करने की अपील करते हुए कहा कि यह केवल किसी एक संगठन या समुदाय का मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि ऐसे कानूनों पर व्यापक चर्चा और सभी पक्षों से विचार-विमर्श आवश्यक है।

उल्लेखनीय है कि एफसीआरए संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों ने भी चिंता व्यक्त की है। आलोचकों का कहना है कि इससे सरकार के अधिकारों का दायरा बढ़ेगा, जबकि केंद्र सरकार का पक्ष है कि विदेशी फंडिंग व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी निगरानी

Popular Articles