देहरादून: उत्तराखंड में भविष्य में गहराने वाले संभावित बिजली संकट को दूर करने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) को आगामी 25 वर्षों के लिए 1320 मेगावाट राउंड-द-क्लॉक (चौबीसों घंटे) कोयला आधारित बिजली खरीदने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। आयोग की विशेष पीठ के इस फैसले के बाद प्रदेश को लंबे समय के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति का एक मजबूत विकल्प मिल गया है, जिससे आने वाले दशकों में उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ और कटौती की मार पड़ने की आशंका काफी कम हो जाएगी।
बिजली खरीद और आयोग के फैसले से जुड़ी मुख्य बातें:
- वर्ष 2030-31 से शुरू होगी आपूर्ति: बिजली नियामक आयोग ने साफ किया है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत राज्य को वित्तीय वर्ष 2030-31 से बिजली की आपूर्ति मिलना शुरू होगी। हालांकि, यूपीसीएल ने अपने शुरुआती प्रस्ताव में इसे वर्ष 2029-30 से चालू करने की मांग की थी, लेकिन परियोजना निर्माण के लिए निर्धारित 48 महीनों के तकनीकी समय को देखते हुए आयोग ने इसे 2030-31 से प्रभावी माना है।
- प्रतिस्पर्धी बोली (Competitive Bidding) से होगी खरीद: आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 1320 मेगावाट बिजली की यह दीर्घकालिक खरीद पारदर्शी व्यवस्था के तहत ‘टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली’ के माध्यम से ही की जाएगी, ताकि राज्य को सबसे किफायती और उचित दरों पर बिजली मिल सके।
- लगातार बढ़ रहे बिजली घाटे से मिलेगी मुक्ति: यूपीसीएल के एक आंतरिक आकलन के अनुसार, वर्ष 2030-31 तक आते-आते उत्तराखंड में लगभग सभी महीनों में 446 मेगावाट से लेकर 1311 मेगावाट तक बिजली की भारी किल्लत होने का अनुमान है। यही मासिक घाटा वर्ष 2039-40 तक बढ़ते हुए कई महीनों में 2500 मेगावाट से भी ऊपर पहुंच सकता था, जिसे देखते हुए इस भारी क्षमता की खरीद को समय रहते मंजूरी देना उपभोक्ता हित में बेहद जरूरी माना गया।
- नियामक आयोग की विशेष पीठ ने जारी किया आदेश: इस महत्वपूर्ण फैसले पर अंतिम मुहर उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य (विधि) अनुराग शर्मा और सदस्य (तकनीकी) प्रभात किशोर डिमरी की संयुक्त पीठ ने सुनवाई के बाद लगाई।
- अधिशेष (Surplus) बिजली के बेहतर उपयोग की सलाह: आयोग ने यूपीसीएल को अग्रिम तौर पर यह रणनीति बनाने के लिए भी कहा है कि इस 1320 मेगावाट बिजली के सिस्टम में आने के बाद, जुलाई से सितंबर (मानसून अवधि) के दौरान जब राज्य के अपने जलविद्युत प्लांट पूरी क्षमता पर होते हैं, तब राज्य में बिजली सरप्लस हो सकती है। आयोग ने निर्देश दिया है कि यूपीसीएल इस अतिरिक्त बिजली को बाहर बेचने या बैंकिंग के जरिए दूसरे राज्यों को देने की प्रभावी कार्ययोजना अभी से तैयार करे।





