देहरादून/गैरसैंण: उत्तराखंड विधानसभा का आगामी बजट सत्र इस बार बेहद तल्ख और हंगामेदार रहने वाला है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार को विभिन्न जनहित के मुद्दों पर घेरने के लिए कमर कस ली है। आगामी बजट सत्र (मार्च 2026) के दौरान सदन के भीतर और बाहर भारी विरोध प्रदर्शन की सुगबुगाहट है। कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल बजट चर्चा तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था, भर्ती घोटालों और राजधानी के मुद्दे पर सरकार से सीधे सवाल करेंगे।
विपक्ष के तरकश में ‘अग्निपथ’ और ‘बेरोजगारी’ के तीर
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष ने पार्टी विधायकों के साथ बैठक कर रणनीति तैयार की है:
- भर्ती परीक्षाओं में देरी: कांग्रेस का आरोप है कि लोक सेवा आयोग द्वारा कई महत्वपूर्ण भर्तियों के परिणाम और नियुक्तियां अभी भी अटकी हुई हैं, जिससे युवाओं में भारी आक्रोश है।
- अग्निपथ योजना का विरोध: उत्तराखंड जैसे सैन्य बहुल राज्य में ‘अग्निपथ’ योजना के प्रभावों और पूर्व सैनिकों की मांगों को लेकर कांग्रेस सदन में कार्यस्थगन प्रस्ताव लाने की तैयारी में है।
- अंकिता भंडारी न्याय मामला: विपक्ष एक बार फिर अंकिता भंडारी मामले में ‘वीआईपी’ के नाम के खुलासे और सीबीआई जांच की मांग को लेकर शोर-शराबा कर सकता है।
गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में सत्र की मांग और ‘धोरण’
सत्र के आयोजन स्थल को लेकर भी सियासत गरमा गई है:
- स्थायी राजधानी का मुद्दा: कांग्रेस का तर्क है कि यदि सरकार वास्तव में पहाड़ों के विकास के प्रति गंभीर है, तो बजट सत्र अनिवार्य रूप से ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में ही होना चाहिए।
- ठंड का बहाना: सत्ता पक्ष द्वारा ठंड या बुनियादी सुविधाओं का हवाला देकर सत्र को देहरादून में ही सीमित रखने की कोशिशों पर विपक्ष ने ‘पहाड़ विरोधी’ होने का ठप्पा लगाने की चेतावनी दी है।
- जनता की आवाज: विपक्षी विधायकों का कहना है कि वे पहाड़ी क्षेत्रों की समस्याओं, जैसे स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और जंगली जानवरों के आतंक को सदन के पटल पर पुरजोर तरीके से रखेंगे।
सत्ता पक्ष की जवाबी रणनीति: ‘विकास का रिपोर्ट कार्ड’
हंगामे की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनके कैबिनेट सहयोगियों ने भी जवाबी तैयारी कर ली है:
- उपलब्धियों का बखान: सरकार इस बजट सत्र में ‘सशक्त उत्तराखंड @25’ के विजन और पिछले चार वर्षों में हुए ऐतिहासिक विकास कार्यों (जैसे यूसीसी, नकल विरोधी कानून और जी-20 की सफलता) को अपनी ढाल बनाएगी।
- अनुशासन की अपील: संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष से सदन की गरिमा बनाए रखने और सार्थक चर्चा में भाग लेने की अपील की है, ताकि बजट प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार हो सके।





