जयपुर। राजस्थान में बुधवार को उस समय राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई, जब वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए। अलवर में आयोजित धरने के दौरान मंत्री ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए।
मंत्री के धरने की मुख्य वजह सफाई कर्मचारियों की भर्ती में देरी बताई जा रही है। शर्मा का आरोप है कि लंबे समय से प्रक्रिया अटकी हुई है, जिससे स्थानीय स्तर पर सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने प्रशासन से मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की।
धरने के दौरान मंत्री ने अलवर की जिला कलेक्टर आर्तिका शुक्ला और नगर निगम आयुक्त की कार्यशैली पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों की ओर से उठाए जा रहे मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
संजय शर्मा ने जिला कलेक्टर और निगम आयुक्त पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। उन्होंने अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की मांग की। मंत्री के अपनी ही सरकार के प्रशासन के खिलाफ सड़क पर उतरने से विपक्ष को भी सरकार पर निशाना साधने का मौका मिल गया है।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब मंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक की खबरें सामने आईं। मंत्री ने अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या अधिकारी सरकार से भी बड़े हैं।
राजस्थान में किसी मंत्री के अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भाजपा नेता किरोड़ी लाल मीणा भी विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध का रास्ता अपना चुके हैं। ऐसे में संजय शर्मा के धरने ने सरकार और प्रशासन के बीच समन्वय को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
फिलहाल मंत्री के विरोध के बाद प्रशासन और सरकार की ओर से मामले के समाधान को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सबकी नजर है।





