नई दिल्ली। भारत को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए शुरू की गई ‘सेमीकॉन 2.0’ योजना के तहत चिप डिजाइन और निर्माण क्षमता को बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने योजना को भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से करीब 200 चिप डिजाइन कंपनियों के उभरने की उम्मीद है। योजना के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये के प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।
मंत्री के अनुसार, सेमीकॉन 2.0 का उद्देश्य केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में सेमीकंडक्टर का व्यापक इकोसिस्टम तैयार करना है। इसमें चिप डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग, उपकरण और सामग्री, अनुसंधान एवं विकास तथा कुशल मानव संसाधन जैसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है।
स्टार्टअप्स को मिलेगा डिजाइन क्षेत्र में बढ़ावा
सेमीकॉन 1.0 के तहत चिप डिजाइन से जुड़े स्टार्टअप्स को इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) टूल्स तक पहुंच उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया था। सरकार के मुताबिक 105 से अधिक स्टार्टअप्स को इन टूल्स की सुविधा मिली है और कई स्टार्टअप्स को वेंचर कैपिटल तथा डिजाइन-आधारित प्रोत्साहन भी मिला है।
सरकार का कहना है कि भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन और रिसर्च की क्षमता पहले से मजबूत है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार भारत में वैश्विक सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन कार्यबल का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा कार्यरत है।
वैश्विक कंपनियों से साझेदारी पर जोर
सेमीकॉन इंडिया 2026 के दौरान भारत और विभिन्न देशों की कंपनियों के बीच सेमीकंडक्टर उपकरण, सामग्री और अन्य जरूरी संसाधनों की आपूर्ति को लेकर साझेदारी के अवसरों पर चर्चा हुई। अमेरिका, जापान, नीदरलैंड्स, फिनलैंड, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया सहित कई देशों की कंपनियों ने भारतीय कंपनियों के साथ सहयोग में रुचि दिखाई है।
इसके अलावा टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और एलएंडटी सेमीकंडक्टर ने वैश्विक बाजारों के लिए भारत में सेमीकंडक्टर चिप निर्माण को लेकर साझेदारी की घोषणा की है।
सरकार के अनुसार, सेमीकॉन 2.0 का फोकस भारत में चिप डिजाइन से लेकर निर्माण और आपूर्ति श्रृंखला तक एक व्यापक घरेलू क्षमता विकसित करने पर है।





