तेहरान। मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बाद अब लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग भी दबाव में हैं। इससे तेल की आवाजाही प्रभावित होने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का खतरा बढ़ गया है।
हूती विद्रोहियों ने यमन के लाल सागर तट के बड़े हिस्से और रणनीतिक द्वीपों पर अपना नियंत्रण बढ़ाया है। समूह ने सऊदी अरब से जुड़े जहाजों को निशाना बनाने की धमकी दी है। इसके चलते शिपिंग कंपनियों के लिए बाब-अल-मंदेब मार्ग की सुरक्षा चिंता का विषय बन गई है। हाल के दिनों में इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई है।
सऊदी तेल निर्यात पर असर
तनाव का असर सऊदी अरब की तेल आपूर्ति पर भी पड़ा है। हमलों के बाद सऊदी अरब ने अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का संचालन एहतियातन रोक दिया है। यह पाइपलाइन देश के पूर्वी तेल उत्पादन क्षेत्रों को लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह से जोड़ती है और इसकी क्षमता करीब 70 लाख बैरल प्रतिदिन है।
यह पाइपलाइन होर्मुज जलडमरूमध्य से बचते हुए सऊदी तेल को निर्यात करने का महत्वपूर्ण विकल्प है। इसके बंद होने से वैश्विक बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार
मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि होर्मुज और बाब-अल-मंदेब दोनों प्रमुख मार्गों पर लंबे समय तक व्यवधान रहता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
लाल सागर में जहाजों पर हमलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) भी लगातार निगरानी कर रहा है। संगठन ने क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों और चालक दल की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
मध्य पूर्व में मौजूदा घटनाक्रम ने तेल निर्यात के वैकल्पिक रास्तों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। संघर्ष लंबा खिंचने पर ऊर्जा आपूर्ति, परिवहन लागत और वैश्विक व्यापार पर दबाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है।





