हल्द्वानी में साइबर अपराध का बढ़ता ग्राफ, मुकदमे दर्ज करने तक सिमटी कार्रवाई? ई-चालान और बैंक खातों के जरिए लाखों की चपत
हल्द्वानी। साइबर ठगों के लिए हल्द्वानी मानो खुला मैदान बनता जा रहा है। कभी ई-चालान के नाम पर तो कभी सीधे बैंक खातों में सेंध लगाकर लोगों की जिंदगीभर की कमाई उड़ाई जा रही है। लाखों रुपये की ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसने के सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। पीड़ित बैंक, साइबर हेल्पलाइन और पुलिस के चक्कर काट रहे हैं, जबकि ठग रकम उड़ाकर बेखौफ गायब हो रहे हैं। आखिर साइबर अपराध पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी किसकी है?
दो दिन में खाते से उड़ाए 1.64 लाख रुपये
कोतवाली क्षेत्र निवासी पवन जोशी पुत्र भुवन चंद्र जोशी को बिना सहमति कुल 1 लाख 64 हजार रुपये निकाल लिए गए। पीड़ित ने बैंक और साइबर अपराध हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस से कार्रवाई की गुहार लगाई।
पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी
उधर मानपुर पश्चिम, देवलचौड़ निवासी महेश चंद्र को स्कूटी के चालान का फर्जी मैसेज भेजकर साइबर जाल में फंसाया गया। मोबाइल पर आए लिंक के जरिए कथित तौर पर एपीके फाइल इंस्टॉल कराई गई। इसके बाद 27 अक्टूबर को मोबाइल पर सैकड़ों फर्जी ट्रांजेक्शन मैसेज आने लगे और खाते से यूपीआई के जरिए 3 लाख 65 हजार रुपये निकल गए।
पीड़ित ने बैंक और साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत की। बैंक शाखाओं के चक्कर काटने के बाद काफी मशक्कत से खाता फ्रीज कराया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब खाते में सामान्यतः 50 हजार रुपये से कम का यूपीआई लेनदेन होता था, तो अचानक लाखों रुपये कैसे निकल गए?
सवालों के घेरे में साइबर अपराध पर कार्रवाई
दोनों मामलों में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। लेकिन लगातार सामने आ रहे साइबर ठगी के मामलों ने अपराधियों की गिरफ्तारी और रकम की बरामदगी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ितों को सिर्फ मुकदमा दर्ज होने से राहत नहीं मिलती; उन्हें अपनी मेहनत की कमाई वापस चाहिए और ठगों के खिलाफ ठोस कार्रवाई भी।
साइबर अपराधियों की बढ़ती सक्रियता के बीच पुलिस की जांच और कार्रवाई कितनी प्रभावी साबित हो रही है, यह बड़ा सवाल है। ठगी के बाद मुकदमा दर्ज करना जरूरी है, लेकिन ठगों तक पहुंचना और पीड़ितों को न्याय दिलाना उससे भी बड़ी चुनौती है।





