लिंक खोलते ही मोबाइल हैक, कहीं बैंक खाते से 13 खातों में रकम पार तो कहीं क्रेडिट कार्ड से उड़ाए 1.40 लाख रुपये
हल्द्वानी। साइबर ठगों का जाल लगातार फैल रहा है और आम आदमी की मेहनत की कमाई पलक झपकते साफ हो रही है। हल्द्वानी में दो अलग-अलग मामलों में साइबर अपराधियों ने लोगों को लाखों रुपये की चपत लगा दी। अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए गए, जबकि दूसरे व्यक्ति के दो क्रेडिट कार्ड से 1.40 लाख रुपये का अनधिकृत लेनदेन हुआ। सवाल यह है कि आखिर लोगों की जमा-पूंजी पर हाथ साफ करने वाले साइबर ठग कब पकड़े जाएंगे? हर बार मुकदमा दर्ज होने के बाद जांच की औपचारिकता से आगे कार्रवाई कब बढ़ेगी?
कोतवाली क्षेत्र के मंगल पड़ाव निवासी पंकज लौशाली के बैंक ऑफ बड़ौदा खाते से 2,56,126 रुपये निकाल लिए गए। पीड़ित के मुताबिक, घटना से पांच दिन पहले एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया था। कॉल करने वाले ने उन्हें एक लिंक खोलने को कहा। आरोप है कि इसके बाद उनका मोबाइल हैक कर लिया गया। आठ अक्टूबर की सुबह करीब आठ बजे जब वह नौकरी पर जा रहे थे, तभी खाते से रकम निकलनी शुरू हो गई। देखते ही देखते 13 अलग-अलग खातों में रुपये ट्रांसफर कर दिए गए।
पीड़ित ने पुलिस से रकम वापस दिलाने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनकी तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है।
मुखानी थाना क्षेत्र की सोल्जर कॉलोनी, बिठौरिया निवासी नारायण सिंह रावत भी साइबर ठगों का शिकार हो गए। पीड़ित के अनुसार, छह अक्टूबर को उनके दो क्रेडिट कार्ड से उनकी अनुमति के बिना कुल 1,40,991 रुपये का लेनदेन कर लिया गया। बैंक से संदेश मिलने पर उन्हें ठगी का पता चला। इसके बाद उन्होंने दोनों कार्ड ब्लॉक कराए और संबंधित बैंक व क्रेडिट कार्ड कंपनी को सूचना दी। पीड़ित ने पुलिस से मामले की जांच कर रकम वापस दिलाने और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। मामले में मुखानी थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।
सवाल वही—रकम गई कहां, ठग पहुंचे कहां तक?
दोनों घटनाएं साइबर अपराधियों के बढ़ते खतरे की ओर इशारा करती हैं। एक मामले में रकम 13 खातों में भेजी गई, जबकि दूसरे में क्रेडिट कार्ड के जरिये अनधिकृत लेनदेन हुआ। ऐसे मामलों में रकम किन खातों में पहुंची, लेनदेन कहां से संचालित हुआ और संदिग्धों तक पुलिस कब पहुंचेगी—ये अहम सवाल हैं। मुकदमा दर्ज होना कार्रवाई की शुरुआत है, उसका अंत नहीं। पीड़ितों को राहत तभी मिलेगी, जब जांच ठोस नतीजे तक पहुंचे और ठगी गई रकम की बरामदगी के लिए प्रभावी प्रयास हों।





