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विदेशी फंडिंग का रास्ता साफ: सेवा भारती और हरे कृष्ण मूवमेंट समेत 72 संगठनों को मिली एफसीआरए मंजूरी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 में अब तक 72 स्वयंसेवी संगठनों (एनजीओ) और संस्थाओं को विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) के तहत विदेशी चंदा प्राप्त करने की अनुमति प्रदान की है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मंजूरी पाने वाले प्रमुख संगठनों में सेवा भारती, हरे कृष्ण मूवमेंट इंडिया और प्रोजेक्ट मुंबई सहित कई संस्थाएं शामिल हैं।

गृह मंत्रालय के रिकॉर्ड के मुताबिक, विभिन्न संस्थाओं को उनके कार्यक्षेत्र के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में पंजीकरण दिया गया है। इनमें सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े संगठन शामिल हैं। एफसीआरए के तहत पंजीकरण मिलने के बाद ये संस्थाएं निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुरूप विदेशों से आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकेंगी।

सरकार ने हाल ही में एफसीआरए नियमों में कई संशोधन भी लागू किए हैं, जिनका उद्देश्य विदेशी फंडिंग से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ाना और निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। नए नियमों के तहत संस्थाओं को अपनी गतिविधियों, कार्यक्षेत्र, प्रमुख पदाधिकारियों और अन्य आवश्यक जानकारियों का विस्तृत विवरण देना होगा। साथ ही विभिन्न प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यम से संचालित करने के लिए एफसीआरए पोर्टल का भी आधुनिकीकरण किया गया है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में वर्तमान में लगभग 14,500 सक्रिय एफसीआरए पंजीकृत संस्थाएं कार्यरत हैं। हर वर्ष हजारों नए पंजीकरण, नवीनीकरण और वार्षिक रिटर्न से जुड़े आवेदन गृह मंत्रालय को प्राप्त होते हैं। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से अनुपालन प्रक्रिया सरल होगी, जबकि विदेशी अंशदान के उपयोग पर निगरानी और जवाबदेही भी मजबूत होगी।

एफसीआरए का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेश से प्राप्त धनराशि का उपयोग केवल अनुमत गतिविधियों के लिए हो और उसका देश की सुरक्षा, सार्वजनिक हित तथा प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। गृह मंत्रालय समय-समय पर नियमों की समीक्षा कर आवश्यक बदलाव करता रहता है, ताकि विदेशी फंडिंग व्यवस्था अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनी रहे।

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