नई दिल्ली/शिलॉन्ग। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि पूर्वोत्तर भारत में देश का अगला “विकास इंजन” बनने की पूरी क्षमता मौजूद है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस क्षेत्र की मजबूतियां, विशेषकर जैविक कृषि और सतत विकास आधारित अर्थव्यवस्था, भारत की भविष्य की आर्थिक वृद्धि में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
वित्त मंत्री ने यह बात मेघालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही, जहां उन्होंने कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्र के कृषि, विशेषकर जैविक मसाला उत्पादन और किसानों की भूमिका को भारत की विकास यात्रा से जोड़ते हुए इसे वैश्विक बाजारों तक ले जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर की अर्थव्यवस्था को केवल उत्पादन के पारंपरिक मॉडल तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे “गुणवत्ता आधारित, भरोसेमंद और वैश्विक मानकों वाली कृषि अर्थव्यवस्था” के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। सीतारमण ने कहा कि मेघालय जैसे राज्य अपनी प्राकृतिक विशेषताओं और जैविक उत्पादन की वजह से वैश्विक बाजार में विशेष स्थान बना सकते हैं।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार पूर्वोत्तर के विकास को प्राथमिकता देते हुए बुनियादी ढांचे, कृषि प्रसंस्करण और निर्यात से जुड़े क्षेत्रों में तेजी से काम कर रही है। उनका कहना था कि क्षेत्र में चल रही योजनाएं न केवल स्थानीय किसानों की आय बढ़ाएंगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेंगी।
उन्होंने कहा कि “जब मेघालय के किसान आगे बढ़ेंगे तो पूरा पूर्वोत्तर आगे बढ़ेगा और जब पूर्वोत्तर आगे बढ़ेगा तो भारत की विकास यात्रा को एक नया इंजन मिलेगा।”
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार की यह नीति पूर्वोत्तर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे क्षेत्र की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना है।
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों में कनेक्टिविटी, निवेश और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। सीतारमण का यह बयान इसी व्यापक विकास रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।





