मुंबई। शिवसेना के स्थापना दिवस के अवसर पर महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर तीखा टकराव देखने को मिला। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के गुटों ने अलग–अलग कार्यक्रम आयोजित किए, जहां दोनों ओर से एक–दूसरे पर कड़े राजनीतिक हमले किए गए।
शिंदे गुट के कार्यक्रम में जहां संगठन की “वास्तविक शिवसेना” की विरासत का दावा किया गया, वहीं उद्धव ठाकरे गुट ने केंद्र और भाजपा पर निशाना साधते हुए पार्टी को कमजोर करने की साजिश का आरोप लगाया। दोनों खेमों के नेताओं के बयानों में बॉलीवुड फिल्म ‘शोले’ के किरदारों और “टाइगर–डॉग्स” जैसे प्रतीकात्मक तंजों का इस्तेमाल कर सियासी माहौल को और गरमा दिया गया।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने संबोधन में संकेत दिया कि हालिया राजनीतिक घटनाक्रम “अभी सिर्फ ट्रेलर है, पूरी फिल्म बाकी है”, जिससे भविष्य में और बड़े राजनीतिक बदलावों के संकेत माने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर चल रहे बदलावों को जनता समर्थन दे रही है और असली शिवसेना जनता के बीच काम कर रही है।
दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में बागी नेताओं और भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी को तोड़ने और नेताओं को अलग करने की साजिशें रची गईं, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो रही है। ठाकरे ने अपने भाषण में भावनात्मक और आक्रामक रुख अपनाते हुए कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने की अपील की।
इस अवसर पर दोनों गुटों के बीच बयानबाजी का स्तर काफी बढ़ा हुआ दिखाई दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवसेना के विभाजन के बाद यह स्थापना दिवस केवल सांकेतिक नहीं रहा, बल्कि शक्ति प्रदर्शन और जनाधार साबित करने का मंच बन गया है।
गौरतलब है कि 2022 में हुए राजनीतिक विभाजन के बाद शिवसेना दो प्रमुख धड़ों—एकनाथ शिंदे गुट और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना (यूबीटी) में बंट गई थी। तब से लेकर अब तक दोनों गुटों के बीच वैधता और असली शिवसेना के दावे को लेकर संघर्ष जारी है।
इस बार के स्थापना दिवस समारोह ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना विवाद अभी थमा नहीं है, बल्कि आने वाले समय में यह और तेज हो सकता है।





