हल्द्वानी। उत्तराखंड में संभावित आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए गुरुवार को नैनीताल जिले में बड़े स्तर पर मॉकड्रिल आयोजित की गई। इस दौरान नैनीताल, हल्द्वानी, कालाढूंगी, बेतालघाट और लालकुआं में एक साथ पांच अलग-अलग काल्पनिक आपदा घटनाएं बनाकर राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन ने इंसिडेंट रिस्पांस सिस्टम (IRS) को सक्रिय करते हुए सभी संबंधित विभागों की टीमों को तत्काल घटनास्थलों के लिए रवाना किया।
नैनीताल के मल्लीताल स्थित आलमा कॉटेज क्षेत्र में भूस्खलन की काल्पनिक सूचना पर तहसीलदार अक्षत भट्ट को एरिया इंसिडेंट कमांडर नियुक्त किया गया। मौके पर एसडीआरएफ, पुलिस, फायर सर्विस, स्वास्थ्य विभाग, जल संस्थान, विद्युत विभाग, पशुपालन विभाग, जिला पंचायत सहित 99 माउंटेन ब्रिगेड और एनसीसी आर्मी के 14 कैडेटों ने राहत एवं बचाव कार्य में भाग लिया। इस दौरान कैडेटों को रेस्क्यू ऑपरेशन की व्यावहारिक ट्रेनिंग भी दी गई।
रेस्क्यू टीम ने अत्याधुनिक उपकरणों की सहायता से घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर स्टेजिंग एरिया तक पहुंचाया। यहां चिकित्सा, राहत, भोजन, सहायता और मुआवजा केंद्र पहले से स्थापित किए गए थे। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार तीन घायलों को उपचार के लिए लाया गया, जिनमें दो गंभीर घायलों को बी.डी. पांडे अस्पताल भेजा गया, जबकि अन्य को प्राथमिक उपचार के बाद सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
इसके अलावा बेतालघाट में पहाड़ी से मलबा गिरने और सड़क अवरुद्ध होने, कालाढूंगी में निहाल नदी पर पुल क्षतिग्रस्त होने, हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र में भू-कटाव तथा लालकुआं में गौला नदी में बाढ़ आने जैसी काल्पनिक घटनाओं पर भी अलग-अलग टीमें सक्रिय रहीं। कई स्थानों पर राफ्ट की मदद से फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभ्यास किया गया।
हालांकि घटनास्थलों पर राहत एवं बचाव दल पूरी मुस्तैदी के साथ कार्य करता नजर आया, लेकिन स्टेजिंग एरिया में आपदा जैसी सक्रियता और विभागों के बीच समन्वय अपेक्षाकृत कम दिखाई दिया। मॉकड्रिल का मुख्य उद्देश्य आपदा के समय विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल, संसाधनों की उपलब्धता और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण करना था। जिला प्रशासन ने इसे आपदा प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण अभ्यास बताया।





