जंतर-मंतर जाने से पहले हल्द्वानी में भीम आर्मी और आसपा नेताओं को किया नजरबंद, घरों के बाहर पुलिस का पहरा
फोटो 1हल्द्वानी। लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित धरने में शामिल होने जा रहे भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी (आसपा) के नेताओं को सोमवार सुबह पुलिस ने उनके आवासों पर ही नजरबंद कर दिया। प्रशासन की कार्रवाई के चलते दोनों दलों के नेता और कार्यकर्ता दिल्ली रवाना नहीं हो सके।
जानकारी के अनुसार, भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष नफीस अहमद खान और आजाद समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष सुरेश चंद्र बेरी अपने समर्थकों के साथ दो वाहनों से दिल्ली जाने की तैयारी में थे। इससे पहले ही भारी पुलिस बल उनके घर पहुंच गया और बाहर बैरिकेडिंग कर उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति दिल्ली जाकर प्रदर्शन में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
नजरबंद किए गए लोगों में भीम आर्मी के नफीस अहमद खान, सिराज अहमद, सखावत हुसैन, अनवर अंसारी, रितिक कांत और आफताब आलम शामिल हैं। वहीं आजाद समाज पार्टी के सुलेमान मलिक, खीम चंद्र, जीवन चंद्र आर्य, मोहम्मद सलीम, बालकिशन और मदन राम को भी पुलिस की निगरानी में रखा गया।
भीम आर्मी कार्यकर्ता रितिक कांत ने आरोप लगाया कि संविधान की मूल भावना का गला घोंटा जा रहा है। वहीं जिलाध्यक्ष नफीस अहमद खान ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने दिल्ली जा रहे थे, लेकिन सरकार ने उन्हें घरों में कैद कर लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया है। उन्होंने इसे लोकतंत्र और संविधान की भावना के खिलाफ बताया।
आसपा के जिलाध्यक्ष सुरेश चंद्र बेरी ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद-19 प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है। बिना किसी लिखित आदेश के घर में नजरबंद करना मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विरोध की आवाज से घबराकर लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन कर रही है।प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, बिना आवश्यक अनुमति के राजधानी में प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जा सकती।





