हैदराबाद। भारत-अमेरिका के बीच रक्षा और औद्योगिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोमवार को हैदराबाद स्थित टाटा लॉकहीड मार्टिन एयरोस्ट्रक्चर्स लिमिटेड (TLMAL) के संयंत्र का दौरा किया। उन्होंने भारत में सी-130जे सुपर हरक्यूलिस सैन्य परिवहन विमान के महत्वपूर्ण ढांचे के उत्पादन को दोनों देशों के बढ़ते रक्षा सहयोग का मजबूत उदाहरण बताया।
गोर ने कहा कि भारत में सी-130जे के लिए महत्वपूर्ण संरचनाओं का निर्माण दोनों देशों के बीच बढ़ते औद्योगिक और रक्षा सहयोग को दर्शाता है। उनके अनुसार, इस तरह की साझेदारियां उच्च कौशल वाले रोजगार पैदा करने के साथ आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करती हैं और स्वतंत्र, खुले एवं सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साझा लक्ष्य को आगे बढ़ाती हैं।
वैश्विक उत्पादन नेटवर्क में अहम भूमिका
टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और लॉकहीड मार्टिन के संयुक्त उपक्रम TLMAL को सी-130जे सुपर हरक्यूलिस के वैश्विक उत्पादन नेटवर्क में भारत की महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। हैदराबाद स्थित संयंत्र में विमान के एम्पेनेज यानी पिछले हिस्से की महत्वपूर्ण संरचनाओं का निर्माण किया जाता है। भारत में निर्मित ये हिस्से अमेरिका में तैयार होने वाले नए सुपर हरक्यूलिस विमानों में लगाए जाते हैं।
यह साझेदारी भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी अहम मानी जा रही है। भारतीय उद्योग की वैश्विक एयरोस्पेस आपूर्ति श्रृंखला में बढ़ती भागीदारी से देश की विनिर्माण क्षमता और तकनीकी कौशल को बल मिल रहा है।
80 मध्यम परिवहन विमानों पर नजर
टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और लॉकहीड मार्टिन की साझेदारी भारत की करीब 80 मध्यम परिवहन विमानों की आवश्यकता से जुड़े बहु-अरब डॉलर के कार्यक्रम को लेकर भी सक्रिय है। ऐसे में अमेरिकी राजदूत का संयंत्र दौरा रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में दोनों देशों के बढ़ते सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सी-130जे भारत और अमेरिका, दोनों देशों की सेनाओं में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख सैन्य परिवहन विमान है। इसके उत्पादन में भारतीय कंपनियों की भागीदारी द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को केवल खरीद तक सीमित रखने के बजाय संयुक्त विनिर्माण और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।





