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एक मंच पर दिख सकते हैं जिनपिंग, ट्रंप और पुतिन, चीन में इसी महीने हो सकती है ऐतिहासिक त्रिपक्षीय बैठक

बीजिंग: अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आ सकता है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक ही मंच पर नजर आ सकते हैं। चीन ने पहली बार तीनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों की संभावित त्रिपक्षीय बैठक को लेकर बातचीत की पुष्टि की है। यह बैठक इसी महीने चीन के शेनझेन शहर में आयोजित होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन के दौरान हो सकती है।

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने शुक्रवार को बताया कि तीनों देशों के नेताओं की बैठक को लेकर संबंधित पक्षों के साथ बातचीत चल रही है। हालांकि, अभी तक बैठक की तारीख और एजेंडे को अंतिम रूप नहीं दिया गया है।

तीनों नेताओं के अलग-अलग एजेंडे

इस संभावित बैठक में तीनों नेताओं की प्राथमिकताएं अलग-अलग रहने की संभावना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप परमाणु हथियारों पर नियंत्रण और निरस्त्रीकरण के मुद्दे पर चर्चा करना चाहते हैं। वहीं, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्राथमिकता यूक्रेन युद्ध पर बातचीत करना है। पुतिन चाहते हैं कि इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान यूक्रेन को शामिल न किया जाए।

दूसरी ओर, चीन इस बैठक के जरिए वैश्विक कूटनीति में अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है। तीनों नेताओं को एक मंच पर लाने में सफलता मिलने से बीजिंग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा कूटनीतिक लाभ मिल सकता है।

ट्रंप और जिनपिंग की भी होगी मुलाकात

ट्रंप के इस महीने शेनझेन जाने की संभावना है, जहां उनकी शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक भी हो सकती है। दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर हुआ अस्थायी समझौता जनवरी में समाप्त होने वाला है। ऐसे में व्यापारिक संबंधों और आपसी तनाव को कम करने पर भी चर्चा हो सकती है।

क्या सिर्फ तस्वीर तक सीमित रहेगी बैठक?

विशेषज्ञों का मानना है कि तीनों देशों के हित अलग-अलग होने के कारण किसी बड़े समझौते पर पहुंचना आसान नहीं होगा। रूस इस बैठक के जरिए यूक्रेन मुद्दे पर अमेरिका और चीन को अपने रुख के करीब लाने की कोशिश कर सकता है। वहीं, चीन यूक्रेन युद्ध और परमाणु हथियारों से जुड़े विवादों में सीधे उलझने से बचना चाहेगा।

फिलहाल बैठक को लेकर बातचीत जारी है। यदि तीनों नेता एक साथ आते हैं तो यह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की एक महत्वपूर्ण तस्वीर होगी, हालांकि इससे किसी ठोस समझौते की उम्मीद अभी स्पष्ट नहीं है।

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