देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में करीब 23 साल पुराने जेनी प्रकरण को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत से जुड़े इस मामले में जेनी शनिवार को देहरादून में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जा रही हैं। उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह अपने साथ हुए घटनाक्रम की पूरी जानकारी और उससे जुड़े सबूत सार्वजनिक करेंगी।
जेनी के देहरादून पहुंचने और प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की घोषणा के बाद प्रदेश की सियासत में चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस मामले को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच पहले से ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
23 साल बाद तोड़ी थी चुप्पी
दरअसल, जेनी ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर इस पूरे प्रकरण पर अपनी चुप्पी तोड़ी थी। उन्होंने कहा था कि उनके नाम पर राजनीतिक बयानबाजी की जा रही है, लेकिन किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि उनके साथ वास्तव में क्या हुआ था।
उन्होंने कहा था कि वर्ष 2003 में हुई घटना के बारे में वह खुद अपनी जुबानी बताएंगी और पूरे सबूतों के साथ सामने आएंगी। साथ ही उन्होंने नेताओं से उनके नाम पर राजनीति बंद करने की अपील की थी।
2003 में हरक सिंह रावत ने दिया था इस्तीफा
यह मामला वर्ष 2003 का है, जब असम की रहने वाली जेनी ने देहरादून में एक बच्चे को जन्म दिया था। उस समय उन्होंने तत्कालीन मंत्री हरक सिंह रावत को बच्चे का पिता बताया था। मामला विधानसभा तक पहुंचा और राजनीतिक दबाव के बीच हरक सिंह रावत ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की सरकार ने मामले की सीबीआई जांच कराने की सिफारिश की थी। जांच के दौरान कराए गए डीएनए परीक्षण में बच्चे और हरक सिंह रावत के नमूने मेल नहीं खाए थे। इसके बाद हरक सिंह रावत को क्लीन चिट मिल गई थी।
भाजपा-कांग्रेस के बीच बढ़ी बयानबाजी
हाल के दिनों में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के बयानों के बाद यह मामला फिर चर्चा में आया। वहीं, हरक सिंह रावत ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। कांग्रेस ने भी भाजपा पर पुराने मामले को उठाकर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया है।
अब सभी की निगाहें जेनी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि उनके बयान और दस्तावेजों से उत्तराखंड की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो सकता है।





