नैनीताल/देहरादून। उत्तराखंड में न्यायिक व्यवस्था के तहत एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। उच्च न्यायालय द्वारा जारी आदेशों के तहत राज्यभर के विभिन्न जिलों में न्यायिक अधिकारियों का तबादला और नई तैनाती की गई है। इस व्यापक तबादला सूची के बाद कई जिलों में जिला एवं सत्र न्यायालय से लेकर सिविल जज (वरिष्ठ एवं कनिष्ठ स्तर) तक के पदों पर बदलाव देखने को मिला है।
जारी आदेशों के अनुसार, कई न्यायिक अधिकारियों को एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरित किया गया है, जबकि कुछ अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी सौंपी गई हैं। इस फेरबदल में नैनीताल, देहरादून, उधम सिंह नगर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, टिहरी गढ़वाल और हरिद्वार जैसे जिलों के न्यायिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, नैनीताल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) पद पर भी बदलाव किया गया है, जबकि कई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीशों और सिविल जजों को नई तैनाती दी गई है। इसके साथ ही कुछ अधिकारियों को विशेष अदालतों जैसे एनआई एक्ट कोर्ट और फास्ट ट्रैक कोर्ट में भी भेजा गया है।
इस तबादला सूची में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई न्यायिक अधिकारियों को रिलीव कर नई जगह कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। कुछ मामलों में प्रशासनिक आवश्यकताओं के तहत पुनर्नियुक्ति (repatriation) भी की गई है।
न्यायिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के वार्षिक या अर्धवार्षिक तबादले न्यायिक प्रणाली में संतुलन बनाए रखने और कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किए जाते हैं। इससे लंबित मामलों के निस्तारण में भी तेजी आने की संभावना रहती है।
हालांकि, इतने बड़े स्तर पर हुए इस फेरबदल से कई जिलों में न्यायिक कार्यप्रणाली के शुरुआती दिनों में समायोजन की स्थिति भी बन सकती है, क्योंकि नए अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यभार संभालना होगा।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू माना जा रहा है, जिसके बाद संबंधित सभी न्यायिक अधिकारी अपनी नई तैनाती वाली जगहों पर कार्यभार ग्रहण करेंगे।
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