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उज्बेकिस्तान में राघव चड्ढा ने की भारत के डिजिटल मॉडल और UPI की तारीफ

समरकंद। उज्बेकिस्तान में आयोजित 12वें इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन (IPU) ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ यंग पार्लियामेंटेरियंस में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने भारत के डिजिटल परिवर्तन और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की उपलब्धियों को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि भारत ने दिखाया है कि डिजिटल विस्तार और सामाजिक समावेशन एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।

‘डिजिटल युग में डिजिटल एक्सेस और अधिकार’ विषय पर बोलते हुए चड्ढा ने कहा कि तकनीक का उद्देश्य केवल सुविधाएं बढ़ाना नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग तक पहुंच और अवसर सुनिश्चित करना होना चाहिए। उन्होंने डिजिटल अधिकारों को पहुंच, स्वायत्तता, सुरक्षा और अवसर जैसे चार प्रमुख स्तंभों से जोड़कर देखा।

चड्ढा ने UPI को भारत के डिजिटल परिवर्तन का प्रमुख उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि 2016 में शुरुआत के समय UPI पर पहले महीने करीब 90 हजार लेनदेन हुए थे, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में इसके जरिए 240 अरब से अधिक लेनदेन हुए, जिनकी कुल कीमत करीब 314 लाख करोड़ रुपये रही। उन्होंने कहा कि इसकी असली उपलब्धि आंकड़े नहीं, बल्कि यह है कि छोटे दुकानदार, कामगार और छोटे कारोबारी भी आसानी से डिजिटल भुगतान कर पा रहे हैं।

चड्ढा ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच UPI को उज्बेकिस्तान के QR भुगतान तंत्र से जोड़ने के समझौते का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि व्यवस्था शुरू होने के बाद भारत से उज्बेकिस्तान जाने वाले छात्र और पर्यटक भारतीय बैंक खाते से सीधे भुगतान कर सकेंगे। इससे नकदी, अलग कार्ड और विदेशी मुद्रा से जुड़ी परेशानियां कम हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि डिजिटल विकास के साथ नागरिकों की निजता और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है। चड्ढा ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक का इस्तेमाल नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के साथ होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि डिजिटल युग की असली परीक्षा यह नहीं है कि मशीनें कितनी स्मार्ट हो गई हैं, बल्कि यह है कि सबसे गरीब जिले में सस्ता मोबाइल इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति को भी वही डिजिटल पहुंच, सुरक्षा और अवसर मिलें जो समाज के अन्य लोगों को उपलब्ध हैं।

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