वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव और गहराता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने ईरान पर लगातार नौवीं रात हवाई हमले किए हैं, जबकि रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य पर नाकाबंदी और सैन्य गतिविधियां तेज कर दी गई हैं। इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में बड़े क्षेत्रीय संघर्ष की आशंकाओं को बढ़ा दिया है।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी हमलों का निशाना ईरान के सैन्य ठिकाने, कमांड सेंटर, वायु रक्षा प्रणाली और संचार ढांचे रहे हैं। अमेरिका का कहना है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य अपने सैनिकों और क्षेत्रीय सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना है।
इसके जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाया है। ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी हितों और सहयोगी देशों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं। इससे अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के और फैलने की आशंका बढ़ गई है।
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ रहा है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां बढ़ते तनाव के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिला है।
अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक दबाव बढ़ाया है, जबकि ईरान ने भी इस समुद्री मार्ग को लेकर कड़े बयान दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक होर्मुज क्षेत्र में अस्थिरता बनी रही तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, व्यापार और महंगाई पर पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों देशों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील कर रहा है। हालांकि, मौजूदा हालात में बातचीत की संभावनाएं कमजोर दिखाई दे रही हैं और सैन्य गतिविधियों के बढ़ने से क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका-ईरान टकराव केवल दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव खाड़ी देशों, वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और दोनों पक्षों की सैन्य रणनीति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।





