भोपाल। देश की स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर मध्य प्रदेश की समृद्ध जनजातीय कला और संस्कृति को राष्ट्रपति भवन में विशेष पहचान मिलने जा रही है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले पारंपरिक ‘एट होम’ कार्यक्रम में मध्य प्रदेश की ट्राइबल आर्ट को प्रदर्शित किया जाएगा। इससे देश के प्रमुख मंच पर मालवा-निमाड़ की सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलेगी।
राष्ट्रपति भवन में होने वाले इस आयोजन में मध्य प्रदेश की लोक एवं जनजातीय कला को विशेष स्थान दिया गया है। प्रदेश की कला परंपराएं अपनी विशिष्ट शैली, प्राकृतिक रंगों और स्थानीय जीवन से जुड़े विषयों के लिए जानी जाती हैं। इन कलाओं में जनजातीय समाज की परंपराओं, प्रकृति के प्रति जुड़ाव और सांस्कृतिक मान्यताओं की झलक मिलती है।
राष्ट्रीय मंच पर प्रदेश की पहचान
मालवा और निमाड़ क्षेत्र लंबे समय से अपनी विशिष्ट लोक संस्कृति और कला परंपराओं के लिए पहचाने जाते हैं। यहां की जनजातीय कला ग्रामीण और आदिवासी जीवन के विविध रंगों को सामने लाती है। राष्ट्रपति भवन जैसे प्रतिष्ठित मंच पर इन कलाओं का प्रदर्शन प्रदेश के कलाकारों और हस्तशिल्प परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित ‘एट होम’ कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक विविधता को सामने लाने की परंपरा रही है। इस बार मध्य प्रदेश की जनजातीय कला का शामिल होना राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय पटल पर प्रस्तुत करने का अवसर है।
कला संरक्षण को मिलेगा प्रोत्साहन
जनजातीय कला को ऐसे प्रतिष्ठित मंच पर जगह मिलने से पारंपरिक कलाकारों और शिल्पकारों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। साथ ही, नई पीढ़ी को अपनी लोक एवं जनजातीय विरासत से जोड़ने और इन कला परंपराओं के संरक्षण को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी।
मध्य प्रदेश की कला-संस्कृति को राष्ट्रपति भवन में मिली यह जगह प्रदेश की विविधता और जनजातीय परंपराओं की राष्ट्रीय पहचान को और मजबूत करेगी।





