नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने सुप्रीम कोर्ट की आपत्तियों के बाद कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक के दूसरे भाग में न्यायपालिका से जुड़े अध्याय में व्यापक बदलाव किए हैं। संशोधित अध्याय को जारी करते हुए विवादित अंशों को हटाकर इसे पारंपरिक नागरिक शास्त्र (सिविक्स) की शैली में तैयार किया गया है।
पहले जारी अध्याय में न्यायपालिका की चुनौतियों, भ्रष्टाचार, लंबित मामलों और न्यायिक व्यवस्था से जुड़ी आलोचनात्मक टिप्पणियां शामिल थीं, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने विशेषज्ञ समिति गठित कर अध्याय की समीक्षा कराई और संशोधित संस्करण तैयार कराया।
नई पुस्तक में अब न्याय, संवैधानिक उपचार, न्यायालयों की संरचना, न्यायाधिकरणों (ट्रिब्यूनल), जनहित याचिका (पीआईएल) और विवाद समाधान की प्रक्रिया पर मुख्य रूप से जोर दिया गया है। अध्याय का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय न्यायिक व्यवस्था की भूमिका और कार्यप्रणाली से परिचित कराना बताया गया है।
गौरतलब है कि न्यायपालिका पर आधारित पुराने अध्याय को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर मामला मानते हुए एनसीईआरटी से जवाब मांगा था। अदालत की टिप्पणी के बाद विवादित पुस्तक वापस ली गई थी और संशोधित संस्करण तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। अब नए अध्याय को पाठ्यक्रम में शामिल कर दिया गया है।





