लेह। सिंधु जल संधि के निलंबन के बीच भारत ने लद्दाख में सिंधु नदी के पानी के स्थानीय इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। लेह के उपशी में सिंधु नदी पर देश का पहला रॉक चेक डैम तैयार किया गया है। प्राकृतिक बड़े पत्थरों से बने इस बांध में सीमेंट या कंक्रीट का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इससे नदी का जलस्तर करीब 10 फीट तक बढ़ गया है और लगभग 4 करोड़ लीटर पानी का भंडारण हो रहा है।
इस परियोजना का उद्देश्य लद्दाख के उन किसानों को सिंचाई का पानी उपलब्ध कराना है, जिन्हें लंबे समय से जल संकट का सामना करना पड़ रहा था। सिंधु नदी के कई हिस्सों में वसंत के दौरान जलस्तर कम होने के कारण पंपों से पानी खेतों तक पहुंचाना मुश्किल होता था। चेक डैम बनने के बाद जमा पानी को इगू–पे सिंचाई नहर के जरिए आसपास के गांवों के खेतों तक पहुंचाया जा रहा है।
लद्दाख प्रशासन के अनुसार, उपशी में बनाए गए इस चेक डैम में नदी और आसपास के क्षेत्र से जुटाए गए बड़े पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। पत्थरों को आपस में इस तरह व्यवस्थित किया गया है कि तेज बहाव के बावजूद ढांचा टिकाऊ रहे। प्रशासन के मुताबिक यह तरीका पर्यावरण के अनुकूल और कम लागत वाला है।
लद्दाख प्रशासन अब सिंचाई और जल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ऐसे कई और प्रोजेक्ट तैयार कर रहा है। केंद्र को 36 चेक डैम परियोजनाओं का प्रस्ताव भेजा गया है। इनमें लेह क्षेत्र में सात हिमालयन रॉक चेक डैम और कारगिल क्षेत्र में 29 आरसीसी चेक डैम या वियर शामिल हैं। इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत 56 करोड़ रुपये से अधिक है और इनके जरिए 18,600 एकड़ से अधिक भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने का अनुमान है।
यह परियोजना लद्दाख में खेती और जल सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। साथ ही, सिंधु जल संधि को भारत द्वारा निलंबित किए जाने के बाद सीमावर्ती क्षेत्र में सिंधु नदी के पानी के स्थानीय उपयोग के लिए बुनियादी ढांचा विकसित करने का भी संकेत देती है।





