गोपेश्वर। उत्तराखंड के चमोली जिले में 12 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद मां नंदा देवी की बड़ी जात यात्रा शनिवार को सिद्धपीठ कुरुड़ से शुरू हो गई। हिमालयी महाकुंभ के नाम से प्रसिद्ध इस धार्मिक यात्रा को लेकर चमोली के यात्रा मार्ग से जुड़े गांवों में उत्सव का माहौल है। देश-विदेश में रहने वाले प्रवासी और धियाणियां भी मां नंदा की जात में शामिल होने के लिए अपने गांव लौट रहे हैं।
परंपरा के अनुसार मां नंदा की डोली जिस गांव में पहुंचती है, वहां के हक-हकूकधारी श्रद्धापूर्वक डोली को अगले पड़ाव तक पहुंचाते हैं। यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के भोजन और ठहरने की व्यवस्था की जिम्मेदारी भी संबंधित ग्रामीणों की होती है। इसको लेकर यात्रा मार्ग के गांवों में कई दिनों से सफाई, रंग-रोगन और अन्य तैयारियां की जा रही थीं।
रामणी में होगा देव डोलियों का महामिलन
यात्रा का आठवां प्रमुख पड़ाव रामणी रहेगा। यहां मां नंदा की डोली के साथ दशोली बंड की डोली, भगवान बदरी विशाल की छंतोली, लाता की नंदा तथा अन्य देवी-देवताओं की डोलियों और छंतोलियों का मिलन होगा। इसे यात्रा के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आकर्षणों में माना जाता है।
रामणी से आगे यात्रा का मार्ग अधिक दुर्गम हो जाता है। वाण के बाद आने वाले पांच निर्जन पड़ावों में मां नंदा की डोली को ले जाने की जिम्मेदारी परंपरानुसार रामणी के ग्रामीण निभाएंगे। 13 सितंबर को यात्रा रामणी से आगे के कठिन पड़ावों की ओर रवाना होगी।
तीन दिन चलेगा लोक सांस्कृतिक मेला
देव डोलियों के रामणी पहुंचने के अवसर पर 11 से 13 सितंबर तक श्री नंदा देवी रामणी लोक सांस्कृतिक पर्यटन विकास मेले का आयोजन किया जाएगा। इसमें धार्मिक आयोजनों के साथ स्थानीय लोक संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।
नंदा देवी बड़ी जात केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोक आस्था, परंपरा और सामूहिक संस्कृति का भी प्रतीक है। यात्रा के दौरान गांव-गांव से जुड़ता श्रद्धालुओं का कारवां इसे एक विशाल लोक उत्सव का स्वरूप देता है।





