पुणे। स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर से जुड़े मानहानि मामले में पुणे की विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान उनके पोते सत्याकी सावरकर ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बयानों को गलत बताते हुए कई दावों का खंडन किया। उन्होंने अदालत में कहा कि सावरकर ने ब्रिटिश शासन से जेल से रिहाई पाने के लिए दया याचिकाएं नहीं लिखी थीं, बल्कि उनका उद्देश्य राजनीतिक बंदियों के हितों की रक्षा करना था।
सत्याकी सावरकर ने अदालत को बताया कि सावरकर द्वारा भेजे गए आवेदन प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा थे और उन्हें केवल व्यक्तिगत रिहाई के लिए लिखी गई दया याचिकाओं के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सावरकर की रिहाई राजनीतिक परिस्थितियों और उस समय हुए व्यापक प्रयासों के बाद संभव हुई थी।
सुनवाई के दौरान राहुल गांधी के उस कथित बयान का भी उल्लेख हुआ, जिसमें उन्होंने लंदन में आयोजित एक कार्यक्रम में सावरकर पर एक पुस्तक में मुस्लिम व्यक्ति पर हमले का उल्लेख करने का आरोप लगाया था। सत्याकी सावरकर ने अदालत में कहा कि सावरकर ने अपनी किसी भी पुस्तक में ऐसी घटना का जिक्र नहीं किया और राहुल गांधी का दावा तथ्यों पर आधारित नहीं है।
यह आपराधिक मानहानि का मामला राहुल गांधी के वर्ष 2023 में लंदन में दिए गए भाषण के बाद दायर किया गया था। मामले की सुनवाई विशेष अदालत में जारी है और दोनों पक्ष अपने-अपने साक्ष्य एवं तर्क अदालत के समक्ष पेश कर रहे हैं। आगामी सुनवाई में मामले पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।





