नई दिल्ली/मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के दिल्ली पहुंचकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की तैयारी की खबरों ने पार्टी के भीतर संभावित टूट की अटकलों को तेज कर दिया है। बताया जा रहा है कि सांसद अलग संसदीय समूह बनाने की मांग कर सकते हैं।
इन खबरों के बीच शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने गंभीर आरोप लगाए हैं। राउत का दावा है कि उनकी पार्टी के सांसदों को पाला बदलने के लिए करोड़ों रुपये का लालच दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ सांसदों को 15 करोड़ रुपये तक की पेशकश की गई है और यह रकम केवल अग्रिम भुगतान है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि “ऑपरेशन टाइगर” के तहत उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों को एकजुट कर अलग समूह बनाने की कोशिश चल रही है। सूत्रों के मुताबिक, यदि पर्याप्त संख्या में सांसद साथ आते हैं तो वे लोकसभा में अलग पहचान की मांग कर सकते हैं।
वहीं, संभावित बगावत की खबरों को देखते हुए शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर किसी भी अलग गुट को मान्यता नहीं देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पार्टी से अलग होकर बनने वाले किसी समूह को संवैधानिक और कानूनी आधार पर मान्यता नहीं दी जानी चाहिए।
दूसरी ओर, पार्टी नेतृत्व लगातार एकजुटता का दावा कर रहा है। संजय राउत ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के सभी सांसद उद्धव ठाकरे के संपर्क में हैं और पार्टी में किसी तरह की टूट नहीं होगी। हालांकि सांसदों की दिल्ली में मौजूदगी और राजनीतिक गतिविधियों ने अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।
यदि यह घटनाक्रम आगे बढ़ता है तो यह उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष से संभावित मुलाकात और सांसदों के अगले कदम पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।





