नई दिल्ली। ब्रिक्स बिजनेस फोरम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक सहयोग और आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में भू-राजनीतिक तनाव, महामारी और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे समय में देशों को आर्थिक झटकों का सामना करने के लिए अपनी क्षमता मजबूत करनी होगी।
जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच अधिक आर्थिक गतिविधियां और आर्थिक सुरक्षा बेहतर आत्मनिर्भरता का आधार बन सकती हैं। इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार से अलग होना नहीं, बल्कि बाहरी संकटों का सामना करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े और प्रतिस्पर्धी बने रहना है।
विदेश मंत्री ने कारोबार को आसान बनाने की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के व्यवसायों के लिए नए साझेदार तलाशना, बाजारों तक पहुंच बनाना और आपूर्ति नेटवर्क को आपस में जोड़ना महत्वपूर्ण है। इसके लिए भरोसेमंद लॉजिस्टिक्स, पारदर्शी निवेश व्यवस्था और विविध व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देना होगा।
उन्होंने तकनीक और डिजिटलाइजेशन को आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। जयशंकर के अनुसार, तकनीकी प्रगति और नवाचार उत्पादकता बढ़ाने के साथ नए व्यापारिक अवसर भी पैदा कर सकते हैं। भारत ब्रिक्स के भीतर स्टार्टअप और नवाचार आधारित कंपनियों के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भी काम कर रहा है।
भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम में रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी को प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में रखा गया है। भारत 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।
शिखर सम्मेलन में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, सीमा-पार भुगतान, डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। ब्रिक्स में वर्तमान में 11 सदस्य देश हैं और यह समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था में उभरती शक्तियों के सहयोग के एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।





