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लोकसभा में गूंजी Gen Z की भाषा, एंटी पेपर लीक बिल पर बहस के दौरान ‘डेलुलु’, ‘फोमो’ और ‘क्लॉक्ड इट’ बने चर्चा का विषय

नई दिल्ली। लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक रोकने से जुड़े संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान मंगलवार को सदन का माहौल उस समय अलग नजर आया, जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई सांसदों ने अपने भाषणों में Gen Z (युवा पीढ़ी) की लोकप्रिय इंटरनेट स्लैंग का इस्तेमाल किया। गंभीर विषय पर चल रही बहस के बीच ‘डेलुलु’, ‘फोमो’, ‘एमआईए’ और ‘क्लॉक्ड इट’ जैसे शब्दों ने राजनीतिक तकरार को नया रंग दे दिया।

शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वह लंबे समय तक MIA (Missing in Action) रहा, बाद में FOMO (Fear of Missing Out) का शिकार हुआ और अंत में ‘Delulu’ (भ्रम में रहने वाला) बन गया। वहीं भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने सरकार के पक्ष में बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समस्या को समय रहते “Clocked It” यानी सही समय पर पहचानकर समाधान प्रस्तुत किया।

भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी विपक्ष को “डेलुलु” बताते हुए कहा कि यह मान लेना कि युवा पूरी तरह विपक्ष के साथ हैं, वास्तविकता से दूर है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि व्यवस्था को ठीक करने के लिए “सोर्स कोड” बदलना होगा।

विपक्ष की ओर से प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी युवा पीढ़ी का संदर्भ देते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री Gen Z का विश्वास जीतना चाहते हैं तो केवल कैमरे के एंगल बदलने से काम नहीं चलेगा, बल्कि सोच और दृष्टिकोण में बदलाव लाना होगा। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने छात्र आंदोलनों का हवाला देते हुए सरकार के रवैये पर सवाल उठाए।

हालांकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने इस दौरान आपत्ति जताते हुए कहा कि संसद में चर्चा का विषय परीक्षा प्रणाली और छात्रों का भविष्य है, न कि Gen Z की शब्दावली। उन्होंने सांसदों से मूल मुद्दे पर केंद्रित रहने की अपील की।

एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पर बहस के बीच Gen Z स्लैंग का प्रयोग सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युवा मतदाताओं से संवाद स्थापित करने के लिए अब संसद की भाषा और राजनीतिक शैली में भी बदलाव दिखाई देने लगा है।

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