नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि लेटरल एंट्री (सीधी भर्ती के माध्यम से विशेषज्ञों की नियुक्ति) पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस व्यवस्था को लेकर सरकार व्यापक स्तर पर परामर्श प्रक्रिया में लगी हुई है और विभिन्न हितधारकों की राय ली जा रही है।
मंत्री ने बताया कि लेटरल एंट्री का उद्देश्य प्रशासन में विशेषज्ञता को शामिल करना है, जिससे नीति निर्माण और शासन प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और योग्यता आधारित है तथा इसका मकसद प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करना है, न कि किसी भी मौजूदा व्यवस्था को कमजोर करना।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि हाल के समय में लेटरल एंट्री को लेकर जो भी भ्रम या गलतफहमियां फैली हैं, वे निराधार हैं। सरकार इस मुद्दे पर सभी पक्षों—विशेषज्ञों, प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य हितधारकों—से विचार-विमर्श कर रही है ताकि एक संतुलित और प्रभावी नीति तैयार की जा सके।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य प्रशासन में दक्षता बढ़ाना और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को नीति निर्माण से जोड़ना है। इसके लिए चयन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और मेरिट आधारित प्रणाली अपनाई जाती है।
सूत्रों के अनुसार, लेटरल एंट्री प्रणाली को लेकर विभिन्न स्तरों पर समीक्षा की जा रही है और भविष्य में इसमें और सुधार किए जा सकते हैं। सरकार का मानना है कि बदलते समय के साथ प्रशासनिक व्यवस्था में विशेषज्ञता का समावेश आवश्यक है, जिससे तेजी से निर्णय लिए जा सकें और योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन हो सके।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि लेटरल एंट्री पर कोई रोक नहीं है और यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी, लेकिन इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए निरंतर परामर्श और समीक्षा की जा रही है।
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