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राहुल गांधी के चुनाव आयोग से मिलीभगत के आरोपों पर भाजपा का पलटवार, कांग्रेस के चुनावी रिकॉर्ड का दिया हवाला

नई दिल्ली। चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा भाजपा और चुनाव आयोग के बीच कथित मिलीभगत से सत्ता-विरोधी लहर खत्म होने के आरोप लगाए जाने के बाद भाजपा ने पलटवार किया है। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के चुनावी इतिहास का हवाला देते हुए राहुल गांधी के दावे पर सवाल उठाए।

राहुल गांधी ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के पक्ष में चुनावी प्रक्रिया प्रभावित होने के कारण सत्ता-विरोधी लहर का असर कम हुआ है। उनके इन आरोपों के जवाब में भाजपा ने विभिन्न राज्यों में कांग्रेस के लंबे समय से सत्ता से बाहर रहने का उल्लेख किया।

सुधांशु त्रिवेदी ने तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 1967 के बाद से कांग्रेस की सरकार नहीं बनी है। उन्होंने पश्चिम बंगाल का भी जिक्र किया, जहां 1977 के बाद कांग्रेस सत्ता में नहीं लौटी। भाजपा प्रवक्ता ने बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा के चुनावी इतिहास का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, बिहार में 1990 के बाद, उत्तर प्रदेश में 1989 के बाद और ओडिशा में 1999 के बाद कांग्रेस की सरकार नहीं बनी है।

भाजपा ने राहुल गांधी के चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए उनके राजनीतिक तर्कों पर भी सवाल उठाए। वहीं, कांग्रेस लगातार SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रख रही है।

इस बीच चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े निर्णयों पर अधिकारियों के बीच मतभेद के आरोपों पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी शामिल हैं।

चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच यह राजनीतिक विवाद ऐसे समय बढ़ा है, जब मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। दोनों पक्षों के दावों और आरोपों के बीच चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।

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