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भ्रामक विज्ञापनों पर CCPA की सख्ती, कई कंपनियों पर कार्रवाई और जुर्माना

नई दिल्ली। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए विभिन्न कंपनियों पर कार्रवाई तेज कर दी है। उपभोक्ताओं को गलत या अधूरी जानकारी देकर गुमराह करने के मामलों में कई कंपनियों पर जुर्माना भी लगाया गया है।

हाल ही में सामने आए मामलों में CCPA ने पाया कि कुछ कंपनियां अपने उत्पादों के प्रचार में “100% शुद्ध”, “पूरी तरह प्राकृतिक” जैसे दावे कर रही थीं, जबकि वास्तविकता इससे अलग थी। जांच में इन दावों को भ्रामक और उपभोक्ताओं को प्रभावित करने वाला पाया गया।

इसी आधार पर CCPA ने सख्त कार्रवाई करते हुए दो प्रमुख कंपनियों—स्टोरिया फूड्स एंड बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड और मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशलिटीज लिमिटेड—पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई उनके उत्पादों पर “100%” जैसे दावों के गलत उपयोग के चलते की गई।

प्राधिकरण का कहना है कि इस तरह के विज्ञापन उपभोक्ताओं के विश्वास को प्रभावित करते हैं और बाजार में अनुचित प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देते हैं। CCPA ने स्पष्ट किया है कि उत्पाद की वास्तविक संरचना, सामग्री और गुणवत्ता को छिपाकर या बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करना उपभोक्ता संरक्षण कानून का उल्लंघन है।

इसके अलावा CCPA ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, ई-कॉमर्स कंपनियों और कोचिंग संस्थानों के विज्ञापनों पर भी निगरानी और कड़ी की जाएगी। हाल के महीनों में कई मामलों में भ्रामक दावों के चलते कंपनियों पर लाखों रुपये तक के जुर्माने लगाए गए हैं।

उपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, CCPA की यह कार्रवाई देश में विज्ञापन मानकों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे कंपनियों को अपने दावों में पारदर्शिता बरतने और वास्तविक जानकारी देने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

CCPA ने उपभोक्ताओं से भी अपील की है कि वे किसी भी विज्ञापन के दावों पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें और भ्रामक विज्ञापनों की शिकायत संबंधित पोर्टल पर दर्ज कराएं।

इस तरह की कार्रवाइयों से सरकार का उद्देश्य बाजार में पारदर्शिता बढ़ाना और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना बताया गया है।

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