नई दिल्ली/जिनेवा। पश्चिम एशिया में चल रही अमेरिका–ईरान शांति वार्ता उस समय अचानक तनावपूर्ण हो गई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी धमकी के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत से वॉकआउट कर दिया। यह घटना स्विट्जरलैंड में चल रही उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान सामने आई, जहां दोनों पक्षों के बीच परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही थी।
सूत्रों के अनुसार, वार्ता की शुरुआत से ही माहौल तनावपूर्ण था, लेकिन स्थिति तब बिगड़ गई जब ट्रंप ने ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों को लेकर आक्रामक बयान दिया। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि अगर ईरान ने अपनी गतिविधियां नहीं रोकीं तो उसे “कड़े सैन्य परिणाम” भुगतने होंगे।
इन बयानों के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने बैठक स्थल छोड़ दिया और बातचीत को “अपमानजनक और अस्वीकार्य” बताते हुए विरोध दर्ज कराया। ईरानी पक्ष का कहना है कि इस तरह की धमकियां कूटनीतिक प्रक्रिया को कमजोर करती हैं और वार्ता के उद्देश्य के विपरीत हैं।
हालांकि मध्यस्थ देशों की भूमिका के बाद कुछ तकनीकी स्तर की बातचीत आगे भी जारी रखने की कोशिश की गई। कतर और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थों ने दोनों पक्षों के बीच संवाद बनाए रखने की पहल की है।
बताया जा रहा है कि वार्ता का मुख्य एजेंडा ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण, प्रतिबंधों में ढील और क्षेत्रीय संघर्षों में कमी लाना था। लेकिन ट्रंप के बयान के बाद बढ़े तनाव ने बातचीत की प्रगति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ईरान के विदेश मंत्रालय से जुड़े सूत्रों ने कहा कि तेहरान अभी भी बातचीत के पक्ष में है, लेकिन “सम्मान और समानता” के आधार पर ही आगे बढ़ेगा। वहीं, अमेरिकी पक्ष ने दावा किया है कि बातचीत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है और तकनीकी स्तर पर संपर्क जारी रह सकता है।
इस घटना के बाद पश्चिम एशिया में एक बार फिर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच भरोसा बहाल नहीं हुआ, तो शांति प्रयासों को बड़ा झटका लग सकता है।





