बेंगलुरु। भारत के प्रख्यात सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी अशोक सेन को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित ऑस्कर क्लेन मेडल से सम्मानित किया गया है। यह उपलब्धि हासिल करने वाले वह पहले भारतीय भौतिक विज्ञानी बन गए हैं। उन्हें यह सम्मान स्ट्रिंग थ्योरी, ब्लैक होल और क्वांटम भौतिकी के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय शोध के लिए दिया गया है।
बेंगलुरु स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल साइंसेज (ICTS) ने 22 अक्टूबर को इस सम्मान की घोषणा की। अशोक सेन इसी संस्थान में ICTS-इन्फोसिस माधव चेयर प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं।
स्ट्रिंग थ्योरी में अहम योगदान
अशोक सेन को आधुनिक स्ट्रिंग थ्योरी के प्रमुख वैज्ञानिकों में गिना जाता है। उनके शोध ने ब्रह्मांड की मूल संरचना, गुरुत्वाकर्षण और क्वांटम सिद्धांत के बीच संबंधों को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उनके प्रमुख कार्यों में एस-ड्यूलिटी, ब्लैक होल की एंट्रॉपी की सटीक गणना और स्ट्रिंग फील्ड थ्योरी शामिल हैं। स्ट्रिंग थ्योरी के अनुसार, पदार्थ के मूल घटकों को केवल बिंदु जैसे कणों के बजाय अत्यंत सूक्ष्म, धागे जैसी संरचनाओं के रूप में समझा जा सकता है। यह सिद्धांत प्रकृति के मूल कणों और बलों को एक व्यापक ढांचे में समझाने का प्रयास करता है।
स्टॉकहोम में दिया व्याख्यान
अशोक सेन ने 22 अक्टूबर को स्वीडन के स्टॉकहोम विश्वविद्यालय के अल्बानोवा केंद्र में ऑस्कर क्लेन मेमोरियल लेक्चर दिया। उनके व्याख्यान का शीर्षक था, ‘ग्रेविटी फ्रॉम स्ट्रिंग्स एंड स्ट्रिंग्स फ्रॉम ग्रेविटी’। इसमें उन्होंने बताया कि स्ट्रिंग थ्योरी किस तरह गुरुत्वाकर्षण के सुसंगत क्वांटम सिद्धांत को समझने और ब्लैक होल से जुड़ी वैज्ञानिक पहेलियों को सुलझाने में मदद कर सकती है।
पहले भी मिल चुके हैं कई बड़े सम्मान
ऑस्कर क्लेन मेडल की शुरुआत 1988 में हुई थी। यह सम्मान स्टॉकहोम विश्वविद्यालय और रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज की नोबेल कमेटी फॉर फिजिक्स द्वारा प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है। इससे पहले कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और नोबेल पुरस्कार विजेता इसे प्राप्त कर चुके हैं।
अशोक सेन को वर्ष 2012 में ब्रेकथ्रू प्राइज इन फंडामेंटल फिजिक्स और 2014 में डिराक मेडल भी मिल चुका है। भारत सरकार ने उन्हें 2001 में पद्मश्री और 2013 में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। उनकी यह उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय में भारत की प्रतिष्ठा को और मजबूत करती है।





