नई दिल्ली। फ्रांस के साथ राफेल लड़ाकू विमानों की प्रस्तावित खरीद भारत में लड़ाकू विमान निर्माण की दूसरी उत्पादन लाइन स्थापित करने में मदद करेगी। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि इस सौदे के तहत फ्रांस भारत में राफेल का महत्वपूर्ण स्तर पर स्वदेशीकरण के साथ निर्माण करने पर सहमत हुआ है।
रक्षा सम्मेलन 2026 में ‘क्षमता के लिए रणनीति : भारत की रक्षा बढ़त का निर्माण’ विषय पर चर्चा के दौरान सिंह ने कहा कि राफेल एक सिद्ध लड़ाकू विमान है। भारत की मांग पर फ्रांस ने देश में इसके निर्माण और स्वदेशीकरण को लेकर सहमति जताई है। इससे भारत को लड़ाकू विमानों के लिए एक और उत्पादन लाइन स्थापित करने का अवसर मिलेगा।
तेजस कार्यक्रम भी जारी रहेगा
रक्षा सचिव ने स्पष्ट किया कि राफेल की खरीद से भारत के स्वदेशी एलसीए तेजस मार्क-1ए कार्यक्रम पर असर नहीं पड़ेगा। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के नेतृत्व में तेजस का विकास और उत्पादन जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि एचएएल से तेजस मार्क-1ए के एक स्क्वाड्रन की आपूर्ति वर्ष के अंत तक होने की उम्मीद है।
घरेलू रक्षा उद्योग को मिलेगा लाभ
राफेल सौदे को भारत में रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भारत सरकार की योजना के तहत राफेल विमानों के बड़े हिस्से का निर्माण देश में किए जाने का प्रावधान है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए उत्पादन, आपूर्ति श्रृंखला और तकनीकी क्षमताओं के विस्तार के अवसर बढ़ सकते हैं। फरवरी 2026 में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने भारतीय वायुसेना के लिए राफेल समेत मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी और अधिकांश विमानों के भारत में निर्माण की बात कही गई थी।
रक्षा सचिव ने कहा कि भारत की रणनीति तत्काल सैन्य जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ स्वदेशी रक्षा तकनीक और उत्पादन क्षमता को आगे बढ़ाने की है। राफेल और तेजस कार्यक्रमों को समानांतर रूप से आगे बढ़ाने का उद्देश्य वायुसेना की जरूरतों को पूरा करना और घरेलू लड़ाकू विमान निर्माण का आधार मजबूत करना है।





