गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर विवाद बढ़ गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने गढ़वाल स्काउट्स के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल शांतनु को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। प्रशासन ने भविष्य में इस तरह के आयोजन की पुनरावृत्ति न होने देने के निर्देश भी दिए हैं।
बिना अनुमति आयोजन पर उठे सवाल
जिलाधिकारी की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि विभिन्न संचार माध्यमों और इंटरनेट मीडिया के जरिए बदरीनाथ धाम में बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन की जानकारी मिली। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और उच्च आवाज वाले साउंड सिस्टम का इस्तेमाल किया गया।
प्रशासन ने बदरीनाथ धाम को प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक केंद्र बताते हुए कहा कि इस तरह के सामूहिक आयोजन और तेज ध्वनि वाले साउंड सिस्टम से नियमित पूजा-अर्चना प्रभावित हो सकती है। इससे धार्मिक विद्वानों में असंतोष पैदा होने के साथ स्थानीय प्रशासन की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की बात कही गई है।
अनुमति और साउंड सिस्टम पर मांगा जवाब
नोटिस में कमांडिंग ऑफिसर से पूछा गया है कि बदरीनाथ धाम में इस प्रकार का कार्यक्रम आयोजित करने का औचित्य क्या था और क्या इसके लिए सक्षम प्रशासनिक स्तर से पूर्व अनुमति ली गई थी। इसके साथ ही कार्यक्रम में तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम के इस्तेमाल के कारणों का भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।
यह विवाद बदरीनाथ में आयोजित ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026’ के बाद सामने आया। सेना की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय परंपराओं और प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना बताया गया था। हालांकि कार्यक्रम में कुछ प्रस्तुतियों और उनके स्वरूप को लेकर धार्मिक संगठनों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई थी।
प्रशासन ने दोहराई मर्यादा बनाए रखने की बात
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में बदरीनाथ धाम में इस प्रकार के आयोजन दोबारा न हों, यह सुनिश्चित किया जाए। प्रशासन की ओर से पहले भी आयोजकों को धाम की धार्मिक आस्था, पौराणिक महत्व और स्थानीय परंपराओं के अनुरूप कार्यक्रम आयोजित करने की सलाह दिए जाने की बात कही गई थी।





