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भारत में डेटा लीक का बढ़ता खतरा, साइबर हमले से कंपनियों को औसतन 22 करोड़ रुपये का नुकसान: IBM रिपोर्ट

नई दिल्ली। भारत में डेटा सुरक्षा को लेकर बढ़ती चुनौतियों के बीच साइबर हमलों से होने वाला आर्थिक नुकसान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। आईबीएम की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत में डेटा ब्रीच (Data Breach) से किसी संगठन को होने वाली औसत लागत बढ़कर करीब 22 करोड़ रुपये पहुंच गई है। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 13 प्रतिशत अधिक है।

आईबीएम की कॉस्ट ऑफ ए डेटा ब्रीच रिपोर्ट 2025 के मुताबिक, भारत में डेटा चोरी और साइबर हमलों के कारण कंपनियों को वित्तीय नुकसान के साथ-साथ प्रतिष्ठा और संचालन से जुड़ी परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि डेटा ब्रीच की औसत लागत 2024 में करीब 19.5 करोड़ रुपये थी, जो 2025 में बढ़कर 22 करोड़ रुपये हो गई।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में डेटा ब्रीच के प्रमुख कारणों में फिशिंग हमले, थर्ड पार्टी वेंडर या सप्लाई चेन से जुड़ी कमजोरियां और सुरक्षा खामियों का फायदा उठाना शामिल हैं। फिशिंग हमले कुल घटनाओं में सबसे आम शुरुआती कारण रहे।

आईबीएम ने अपनी रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल और उससे जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों पर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, कई भारतीय संस्थान एआई तकनीक को तेजी से अपना रहे हैं, लेकिन एआई सुरक्षा और गवर्नेंस से जुड़े उपाय उतनी तेजी से विकसित नहीं हो रहे हैं।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि भारत में डेटा ब्रीच की पहचान और उसे नियंत्रित करने में लगने वाला औसत समय 263 दिन रहा। हालांकि, पिछले साल की तुलना में इसमें सुधार हुआ है और कंपनियां अब साइबर घटनाओं का पता लगाने तथा उनसे निपटने में पहले से अधिक सक्षम हो रही हैं।

क्षेत्रों के लिहाज से शोध क्षेत्र को डेटा ब्रीच से सबसे अधिक आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इस क्षेत्र में औसत नुकसान करीब 28.9 करोड़ रुपये रहा, जबकि परिवहन और औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसका बड़ा प्रभाव देखा गया।

साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी हो गया है। कंपनियों को मजबूत सुरक्षा प्रणाली, नियमित ऑडिट और कर्मचारियों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने जैसे कदम उठाने होंगे, ताकि बढ़ते साइबर खतरों से बचा जा सके।

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